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(दो) पंक्ति 35, फ्अधिनियमोंय् के पश्चात् फ्और विनियमोंय् अन्तः स्थापित किया जाए_
(तीन) पंक्ति 39, फ्अधिनियमोंय् के पश्चात् फ्विनियमोंय् अन्तः स्थापित किया जाए_
(चार) पंक्ति 42, फ्अधिनियमोंय् के पश्चात् फ्विनियमोंय् अन्तः स्थापित किया जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
श्री कॉमथः क्या इस खंड को, संशोधित रूप में, सदन के मतदान के लिए रखना आवश्यक नहीं है?
माननीय अध्यक्षः क्या यह वास्तव में आवश्यक है? स्थिति इस प्रकार होगी, फ्कि विधेयक, संशोधित रूप में, पारित किया जायेगा।य् यही प्रस्ताव होगा जिसे मुझे सदन के मतदान के लिए प्रस्तुत करना होगा। फिर कोई विशेष खंड नहीं है, जिसे सदन के मतदान के लिए रखा जाना चाहिए। माननीय सदस्य इस बात को नोट करेंगे कि खंड 5 पर मतविभाजन हुआ था और सदन ने इसे अपनी स्वीकृति दे दी थी। इस खंड पर अलग से मत लिये गये थे। यह संशोधन एक आनुषंगिक संशोधन के रूप में आया है।
माननीय अध्यक्षः नियम 94 के अधीन।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः इस पर आपको विचार करना है। खंडों के बारे में आपने जानबूझकर बचाव का रास्ता अपनाया है कि हर खंड पर अलग-अलग मतदान किया जाये और उपस्थित तथा मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों के मत अभिलिखित किये जाएँ। आपके निदेशानुसार, खंड 5 पास हो गया है। अब हम खंड 5 का संशोधन कर रहे हैं। क्या यह वांछनीय और सुरक्षित तरीका नहीं है कि खंड 5 संशोधित रूप में, अलग से मतदान के लिए रखा जाये और उस पर प्राप्त मत अभिलिखित किये जायें?
माननीय अध्यक्षः वह एक अनियमित तरीका होगा। वह खंड, द्वितीय वाचन के दौरान खण्डवार विचार के समय, सदन द्वारा पहले ही स्वीकार कर लिया गया है। सदन के समक्ष प्रस्ताव यह है कि पूरे विधेयक को, संशोधित रूप में पारित किया जाये। संशोधन एक परिणामिक अथवा मौखिक संशोधन है जिसकी इस समय अनुज्ञा दी जा सकती है। इस समय कोई महत्वपूर्ण संशोधन अनुज्ञेय नहीं है।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 4 जून, 1951, पृष्ठ 10110