33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 349

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्पृष्ठ 4 में पंक्ति 9 के पश्चात् यह जोडि़येः फ्शर्त यह है कि ऐसा मुख्य न्यायाधिपति अथवा किसी उच्च न्यायालय का कोई अन्य न्यायाधीश ऐसी नियुक्ति से तीन महीने के अन्दर भारत की नागरिकता प्राप्त कर लेगा_ और शर्त यह है कि वो व्यक्ति जन्म से भारत का नागरिक नहीं होगा, तो वह भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति अथवा अन्य न्यायधीश नहीं होगा।य्

प्रस्ताव अंगीकार हुआ।

ऽऽडॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जीः यह जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है, एक आनुषंगिक परिवर्तन है। स्पष्टतः यह उन हैदराबाद विनियमों का उल्लेख करता है जिन्हें सदन ने सदन में प्रस्तुत किये गये संशोधन में शामिल किया था। पर खंड के आखिरी भाग का क्या हुआ, जिसमें कहा गया हैः

फ्...........उक्त अधिनियमों (और विनियमों, यदि यह स्वीकृत हो जाता है) में से प्रत्येक, किसी सक्षम विधानमंडल की इसे निरसित अथवा संशोधित करने की शक्ति के अधीन प्रवृत्त रहेगा।य्

जहां तक इन विनियमों का संबंध है जब हैदराबाद में कोई विधानमंडल नहीं है, वे किसी विधानमंडल द्वारा निरसित अथवा संशोधित नहीं किये जा सकते। वहां भी ‘विधानमंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी’ कहकर इसे परिवर्तित किया जाना चाहिए।य्

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वहां जो भी विधानमंडल है, उसे संशोधन करने का अधिकार होगा।

माननीय अध्यक्षः ‘विधानमंडल’ शब्द के अर्थ के बारे में कुछ भ्रम है। विधानमंडल के बारे में यह सोच है कि वह एक ऐसा चैम्बर होता है जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं, इत्यादि। मेरे विचार में यहाँ विधानमंडल का अर्थ है। इसका राजप्रमुख, जो स्वयं विधानमंडल होता है। मेरे विचार में यही सांविधानिक अर्थ है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ।

माननीय अध्यक्षः यदि ऐसा है तो फिर कोई कठिनाई नहीं है।

प्रश्न यह हैः

पृष्ठ में,

(एक) पंक्ति 35, फ्अधिनियमोंय् के पश्चात्, फ्और विनियमोंय् अन्तः स्थापित किया जाए_

ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 2 जून, 1951, पृष्ठ 10035-36