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के संशोधन 1 से 4 द्वारा यथा उपांतरित, श्री हिम्मतसिंहका और श्री हक के क्रमशः संशोधन संख्या 1-भाग 1 और 2 तथा संशोधन संख्या 2, भाग 1 से 8
मैं अनुपूरक सूची संख्या 3 से संशोधन संख्या 4 और 12 से 15 वापस लेता हूँ। शेष संशोधनों को मैं पेश करता हूँ।
श्री चट्टोपाध्याय (पश्चिम बंगाल)ः मैं अनुपूरक सूची संख्या 2 में छपे संशोधन को पेश करना चाहूंगा। इसमें 108 मदें हैं। इनमें से मैं मद संख्या 30 के लिए आग्रह नहीं करना चाहता।
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं एक बात कहना चाहता हूँ। चूंकि मतभेद इतना ज्यादा है, इसलिए मैं यह सुझाव देने के लिए तैयार हूँ कि यह मामला अध्यक्ष महोदय पर छोड़ दिया जाये और वे इसकी मूल बात में कोई फेरबदल किये बिना इसे एक तरह का नामपद्धति का मामला समझें। इस मामले को खुला रखा जाये। जो सदस्य इसमें रुचि रखते हैं, वे अध्यक्ष महोदय के पास जा सकते हैं और इस मत के लिए राजी कर सकते हैं कि यह एक रामपद्धति का मामला है और जो क्षेत्र इन विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों में शामिल हैं उनमें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन किये बिना नाम रखे या बदले जा सकते हैं।
पं. मैत्रेयः मुझे खेद है कि हम इससे सहमत नहीं हो सकते, क्योंकि यदि कोई सदस्य नाम में परिवर्तन करना चाहता है, तो दूसरा सदस्य और किसी अन्य बात के लिए सुझाव दे सकता है और........
श्री चट्टोपाध्यायः आपको डर क्यों हैं?
डॉ. एम.एम. दासः इसमें असुविधा होगी।
श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः श्री चट्टोपाध्याय ने जो बात कही है, वह हम में से अधिकांश को ठीक लगती है। हम नहीं चाहते कि इतने समय बाद कोई आमूल परिवर्तन किया जाये। उन्होंने जिन परिवर्तनों का सुझाव दिया है वे विधि मंत्री द्वारा बताये गये तरीके से आसानी से किये जा सकते हैं ओर मेरे विचार में इस सभा के सदस्यों का भारी बहुमत इसका समर्थन करेगा।
श्री एस.एम. घोष (पश्चिम बंगाल)ः अध्यक्ष महोदय इस आदेश को अन्तिम रूप कैसे दे सकते हैं? मेरे माननीय मित्र ने कुछ नामों का सुझाव दिया है। अन्य सदस्य अन्य नामों का सुझाव दे सकते हैं। इसका तो कोई अन्त ही नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः अध्यक्ष महोदय को यहां उपस्थित होना होगा। उन्हें अन्य सदस्यों
ऽवही, पृष्ठ 15568-77