33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 379

364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सूची संख्या 9 में संशोधन संख्या 3 सभा की अनुमति से वापस लिया गया।

माननीय अध्यक्षः अब मैं उन सभी को इकट्ठा ले रहा हूँ। क्या कोई माननीय सदस्य उन्हें अलग-अलग देना चाहते हैं? ऐसा है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

पं. कुंजरु (उत्तर प्रदेश)ः मैं जानना चाहता हूँ कि कौन-से सिद्धांत के तहत ये सभी संशोधन स्वीकार कर लिए गए हैं। उनमें से एक संशोधन तो समिति के एक सदस्य, श्री टी.एन. सिंह द्वारा दिया गया है। वह संशोधन क्या है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जिन संशोधनों के संबंध में आम समझौता था, उन्हें स्वीकार कर लिया गया है। जिस विशेष संशोधन के बारे में माननीय सदस्य ने पूछा है, वह सूची संख्या 8 में संशोधन संख्या 14 है।

पं. कुंजरुः मेरे मित्र डॉ. अम्बेडकर ने कहा है कि जिन संशोधनों के बारे में आम समझौता था, उन्हें स्वीकार कर लिया गया है। मेरी समझ में यह नहीं आया कि आम समझौते से उनका क्या अभिप्राय है। यदि उनका अभिप्राय यह है कि बहुमत इसके सदस्यों की आम राय है, तो वह तो कई अन्य बातों पर भी हो सकती है। यदि उसी आधार पर परिवर्तन किये जानते थे, तो फिर परिसीमन परामर्शदात्री समिति नियुक्त करने की क्या आवश्यकता थी? मैं जानना चाहूंगा कि इन पर समझौता आम राय से होने के अलावा, उनकी स्वीकृति के कोई और भी कारण थे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में माननीय सदन को मालूम है कि हम उन विभिन्न समितियों के सदस्यों के निर्णयों के आधार पर चल रहे हैं, जो अध्यक्ष महोदय ने निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के लिए नियुक्त की थीं। और जब कभी भी सदस्यगण कोई परिवर्तन करने के लिए राजी हो गये हैं, तो मैंने उस परिवर्तन को स्वीकार करना उचित समझा है। संशोधन संख्या 14, जिसे मैं स्वीकार कर रहा हूँ, ऐसा ही एक संशोधन है।

पं. कुंजरुः क्या उनका अभिप्राय संख्यक दल के सदस्यों से है या अध्यक्ष द्वारा नियुक्त की गई समिति के सदस्यों से है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उसके बारे में मैं यह बताना चाहूंगा कि जहां तक परिसीमन का संबंध है, बहुमत दल के सदस्यों और किसी अन्य दल के सदस्यों के बीच कोई विभेद नहीं किया गया है। सभी सदस्यों को इस कैबिनेट उप-समिति के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था। यह समिति इस मामले पर विचार करने के लिए नियुक्त की गई थी। कोई भी सदस्य, वह किसी भी दल का हो, आकर अपना पक्ष रख सकता है। कुछ सदस्य आये भी थे।