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श्री टी.एन. सिंह (उत्तर प्रदेश)ः श्रीमन्, चूंकि मेरा नाम लिया गया है इसलिए मैं आपकी अनुमति से निवेदन करना चाहूंगा। वह यह है कि जिस संशोधन का मेरे माननीय मित्र ने उल्लेख किया है, वह एक आनुषंगिक संशोधन है जो कर लिया जाना चाहिये था। परन्तु वह समिति के प्रतिवेदन में गलती से रह गया है। मैं उन्हें इसका ब्यौरा व्यक्तिगत रूप से दे सकता हूँ, चूंकि यहां देना सम्भव नहीं है।
माननीय अध्यक्षः क्या कोई और सदस्य अपना संशोधन अलग से उठाना चाहता है?
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन् मेरे विचार में इस मामले पर समिति में चर्चा हुई थी और मैंने भी श्री कपूर को बताया था कि उनका संशोधन अधूरा था और इसलिए उसे अन्य निर्वाचन-क्षेत्रों में कुछ फेरबदल किये बिना स्वीकार नहीं किया जा सका। वह कोई पूरी योजना नहीं दे सके। इसलिए उनका संशोधन स्वीकार नहीं किया जा सका।
श्री जे.आर. कपूरः खड़े हो गए।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य को उत्तर का अधिकार नहीं है। क्या वह यह चाहते हैं कि मैं इन्हें उस समय सदन के लिए रखूं?
श्री जे.आर. कपूरः अवश्य, भले ही यह अस्वीकृत हो जाये।
माननीय अध्यक्षः मैं उन्हें सदन के समक्ष रख दूंगा।
श्री जे.आर. कपूरः नहीं श्रीमन्, मैं उन्हें वापस लेना चाहूंगा।
श्री जे.आर. कपूर के संशोधन सदन की अनुमति से वापस लिए गए।
माननीय अध्यक्षः मैं अब उन सभी सहमत संशोधनों को जिन्हें विधि मंत्री ने प्रस्तुत किया है, रखता हूँ।
सभी संशोधन अंगीकार किए गए।
ऽऽमाननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य को और उन अन्य माननीय सदस्यों को भी, जिन्होंने संशोधन प्रस्तुत किये हैं, अपने-अपने संशोधन वापस लेने की सदन अनुमति देता है?
संशोधन सभा की अनुमति से वापस लिए गए।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 9 जून, 1951, पृष्ठ 10607
ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 9 जून, 1951, पृष्ठ 10610-112