33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 382

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श्री चट्टोपाध्यायः मैं चाहता हूँ कि फ्औपचारिक परिवर्तनय् शब्दों के बाद, ‘‘निर्वाचन क्षेत्रों के नामों सहितय् शब्द अन्तःस्थापित किये जायें। यह संशोधन औपचारिक नहीं है। मेरी राय में यह बहुत सारवान है, क्योंकि कुछ मामलों में.......

माननीय अध्यक्षः मैं उनकी बात को समझता हूँ। यदि वह यह कहते हैं कि यह सारवान है, तो अब कोई संशोधन नहीं किया जा सकता। यदि यह औपचारिक या पारिणामिक संशोधन है जिसके अन्तर्गत, जैसा डॉ. अम्बेडकर ने कहा, कभी-कभी नामों के परिवर्तन भी शामिल हो जायेंगे, तो यह अलग बात होगी। इसलिए इस संशोधन की आवश्यकता नहीं है।

श्री जे.आर. कपूरः क्या आप यह समझते हैं कि निर्वाचन-क्षेत्र के नाम में परिवर्तन, यदि उससे निर्वाचन-क्षेत्र की सीमा में कोई सारवान या थोड़ा-सा भी परिवर्तन होता है, तो वह डॉ. अम्बेडकर के प्रस्ताव के अन्तर्गत आ पायेगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह अध्यक्ष महोदय के स्वविवेक पर निर्भर करता है।

माननीय अध्यक्षः सभा ने कुछ परिवर्तन स्वीकार कर लिये हैं। सभा अध्यक्ष को पारिणामिक अथवा औपचारिक संशोधन करने का अधिकार दे रही है क्योंकि जैसा आज सुबह कहा गया कि किसी क्षेत्र का नाम गलत लिखा जाये जैसे फ्पूर्वय् के स्थान पर फ्पश्चिमय् लिखा जाये, तो ऐसे संशोधन कर दिये जायेंगे। अब और संशोधनों की गुंजाइश नहीं है। यदि सदन एकमत से भी निर्णय ले ले तो, भी अध्यक्ष सदन के निर्णयों से परे नहीं जा सकती। अध्यक्ष केवल वही करेगा, जो सदन के पहले लिये गये निर्णयों को प्रभावी बनाने के लिए नितांत आवश्यक है। पारिणामिक संशोधन इसी बात को ध्यान में रखकर किये जायेंगे।

ऽपटल पर रखे गये कागजात

संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्र सीमांकनµआदेश

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मैं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13 की उप-धारा (3) के अंतर्गत, राष्ट्रपति द्वारा 15 मई, 1951 को जारी किये गये निम्नलिखित आदेश पटल पर रखता हूँः-

(1) संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्र (असम) परिसीमन आदेश, 1951

(2) संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्र (बिहार) परिसीमन आदेश, 1951

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 9 जून, 1951, पृष्ठ 9065-66