366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः इससे सभी प्रस्ताव पिट गए हैं। अब मैं पारिणामिक संशोधनों को लेता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः फ्कि संसदीय और विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन आदेशों के सदन में प्रस्तुत और स्वीकृत संशोधनों के संदर्भ में, उक्त आदेशों में माननीय अध्यक्ष के प्राधिकार के अधीन आवश्यक पारिणामिक, प्रारूप संबंधी और अन्य औपचारिक परिवर्तन किये जायें।य्
डॉ. देशमुखः मैंने भी एक ऐसे ही संशोधन की सूचना दी है। मैं उसे वापस लेना चाहता हूँ।
माननीय अध्यक्षः वह सभा के समक्ष रखा ही नहीं गया है। इसलिए उसे वापस लेने की जरूरत नहीं है।
श्री चट्टोपाध्यायः मैं इस संशोधन में भी एक संशोधन चाहता हूँ। मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्पारिणामिक संशोधन में, जो डॉ. अम्बेडकर के नाम में है, फ्औपचारिक परिवर्तनय् शब्दों के पश्चात् फ्निर्वाचन-क्षेत्रों के नामों सहितय् शब्द अन्तःस्थापित किये जायें।’’
माननीय अध्यक्षः क्या माननीय मंत्री इसे स्वीकार करते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इसे इस प्रकार औपचारिक और बाध्यकारी रूप में स्वीकार नहीं कर सकता।
श्री जवाहरलाल नेहरू (प्रधानमंत्री)ः श्रीमन्, यदि कोई नाम गलत लिखा गया है तो वह सही कर दिया जायेगा। इसके लिए किसी औपचारिक संशोधन की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई छोटी-मोटी गलतियां हैं तो उन्हें तो हमेशा ही ठीक किया जा सकता है।
श्री चट्टोपाध्यायः इस पर आज सुबह काफी बहस हुई थी और इस पर कुछ मतभेद भी था और डॉ. अम्बेडकर ने कहा था, फ्यह नामों का मामला माननीय अध्यक्ष पर छोड़ दिया जाये।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं मानता हूँ। परन्तु मैंने कहा था कि यदि अध्यक्ष महोदय यह समझते हैं कि किसी स्थान के नाम में परिवर्तन एक औपचारिक परिवर्तन है, तो यह तो मेरे संशोधन के अन्तर्गत आ जायेगा।
श्री चट्टोपाध्यायः इसी कारण मैंने यह संशोधन पेश किया है।
माननीय अध्यक्षः अब वह मुझसे क्या चाहते हैं?