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माननीय अध्यक्षः मैं समझता हूँ कि इस प्रकार सभी आदेश निपटा दिये गये।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हां।
माननीय अध्यक्षः मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है कि राष्ट्रपति द्वारा जारी किये गये निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन संबंधी कतिपय आदेशों जिन्हें अभी सभा पटल पर रखा गया है, की प्रतियां प्रेस से प्राप्त होते ही संसदीय सूचना कार्यालय में रख दी जायेंगी।
माननीय संसद इन आदेशों की एक-एक प्रति स्वयं अनुरोध कर ले सकते हैं।
सभा का कार्य
ऽऽमाननीय अध्यक्षः मैं देखूंगा कि इस संबंध में क्या सम्भव है। मैं किसी बात का वायदा नहीं करता।
सभा अब स्थगित हो सकती है.........
पं. ठाकुर दास भार्गव (पंजाब)ः विधेयक को एक बजे तक समाप्त करना बड़ा कठिन होगा। यदि काम 11 बजे तक समाप्त नहीं होता। मैंने कभी किसी विधेयक को गिलोटिन होते नहीं देखा।
माननीय अध्यक्षः यदि आम राय हो जाती है तो हम निस्संदेह समाप्त कर सकते हैं।
पं. ठाकुर दास भार्गवः इसलिए मैं आपसे अनुरोध करूँगा कि आप राय बनाने के लिए और समय दीजिये।
माननीय अध्यक्षः यदि माननीय सदस्य पूरे विधेयक को एक बजे तक समाप्त करने के लिए राजी हैं, वे एक बजने के पांच मिनट पर समवेत होकर विधेयक को समाप्त कर सकते हैं। मुझे इसमें कोई एतराज नहीं है। बात केवल यह है कि कोई समय-सीमा होनी चाहिये। हम इसे समाप्त करने के लिए बैठ सकते हैं। वर्ना चर्चा का कोई अंत नहीं होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मैं नहीं जानता कि व्यवस्था क्या है।
माननीय अध्यक्षः अभी तो हम बैठक स्थगित कर रहे हैं और हम 11.30 बजे पुनः एकत्रित होंगे।
ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 28 मई, 1951, पृष्ठ 9476-77