372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
फ्कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का आगे और संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
यह एक बहुत छोटा-सा विधेयक है और इसका आशय लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में, जो सदन द्वारा कुछ समय पहले पारित किया गया था, संशोधन करना है। इस विधयेक का उद्देश्य भाग-ग राज्यों की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोक सभा में प्रतिनिधित्व का प्रबंध करना है। सदन को स्मरण होगा कि अनुच्छेद 313 और 332 के अंतर्गत, संविधान में ही भाग-क और भाग-ख राज्यों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध हैं। जहां तक भाग-ग राज्यों का संबंध है, इस विषय को संसद और राष्ट्रपति पर छोड़ दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 82 में कहा गया है कि जहां तक भाग-ग राज्यों में लोगों के प्रतिनिधित्व का संबंध है, इसे संसद निपटायेगी और जहां तक भाग-ग राज्यों के प्रशासन का संबंध है, यह अनुच्छेद 239 के अधीन निबटाया जायेगा। जब लोक प्रतिनिधित्व विधेयक इस सदन के समक्ष लाया गया था, तब उचित होता कि जो उपबंध हम विधेयक में अब शामिल करने जा रहे हैं, वह उस विधेयक में होते। परन्तु दुर्भाग्यवश, उस समय की सरकार के पास लोक सभा में भाग-ग राज्यों को आबंटित की जाने वाली सीटों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं थी और न ही उसे यह पता था कि भाग-ग राज्यों से संबंधित उपबंधों में कौन-कौन सी जातियां और जनजातियाँ शामिल की जायेंगी। अतः इन उपबंधों को रोक लिया गया और उन्हें अब सदन के समक्ष लाया गया है।
दो बातों के संबंध में स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। जैसा कि सदन को मालूम है, कुल मिलाकर भाग-ग राज्य दस हैं। इन सभी दस भाग-ग राज्यों में सरकार अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को प्रतिनिधित्व नहीं दे सकी क्योंकि हमें दो अलग-अलग प्रस्तावों पर विचार करना था। एक तो यह कि जिन भाग-ग राज्यों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए प्रतिनिधित्व का उपबंध करना था क्या वहां पर्याप्त संख्या में सीटें थीं ताकि यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए एक सीट आरक्षित कर दी जाये तो परिणाम यह न हो कि वहां की आम जनता को मताधिकार से पूर्णतः वंचित होना पड़े। स्पष्टतः कुछ ऐसे राज्य मौजूद हैं, जो भाग-ग राज्यों में शामिल हैं, जिन्हें लोक सभा में केवल एक ही सीट आबंटित की गई है। उदाहरणार्थ, बिलासपुर
ऽसं. वा., खंड 10, भाग II, 18 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7021-39