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पर वापस लेने के लिए आवेदन कर सकेगा, यदि अपील ऐसी है कि फ़ेडरल न्यायालय के समक्ष नियत दिन के पश्चात् फाइल की गई है तो उसे इस अधिनियम के अधीन इस पर विचार करने की अधिकारिता हो सकेगी_ और फ़ेडरल न्यायालय, अपील में दूसरे पक्षकर को सूचना देने के बाद अपील को ऐसी शर्तों और निबंधनों पर, जो वह उपयुक्त समझे, अपने फ़ाइल पर वापस ले सकेगा।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन, मैं यह संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता। मेरे माननीय मित्र ने यह परिभाषित नहीं किया है कि लंबित अपील क्या है। विधेयक लंबित अपील को परिभाषित करता है। ऐसी अपील, जहाँ कागज़ात प्रेषित कर दिए गए हैं, विधेयक के अधीन लंबित अपील समझी जाएगी। कागज़ात प्रेषित कर दिए जाने के पश्चात् विधेयक में इसे वापस लेने का मात्र इस कारण से कोई उपबंध नहीं है कि यह उपधारणा की जाती है कि जब कागज़ात और दस्तावेज़ प्रेषित कर दिए गए हों तो पक्षकारों को ऐसी लागत देने के लिए सभी दायित्व उपगत हो जाते हैं जो उस अपील में सम्मिलित किए जा सकें और इसीलिए कोई औचित्य नहीं है कि प्रिवी कौंसिल में और यहां पर दोहरे खर्चों की बाध्यता के साथ अपील को फ़ेडरल न्यायालय में क्यों अंतरित किया जाए_ और इसीलिए मेरा यह विचार है कि हमें इस पर केवल वादकारी पर पड़ने वाले खर्चों की दृष्टि से देखना चाहिए। यदि पर्याप्त खर्चे उपगत हो चुके हैं, तो मेरे विचार में यह उपयुक्त नहीं होगा कि अपील को फ़ेडरल न्यायालय में अंतरित किया जाए। निःसंदेह यह उपबंध मौजूद है कि ऐसे अंतरण और वापसी के निबंधन प़ेQडरनल न्यायालय द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं। किंतु मेरे विचार में, इससे पक्षकारों पर अनावश्यक बाध्यता पड़ेगी जिसे वे स्वैच्छिक रूप से स्वीकार नहीं करेंगे और इसीलिए मेरी यह राय है कि वर्तमान स्थिति में विधेयक में अंतर्विष्ट उपबंधों पर ही संतोष किया जाए।
श्री एम. अनन्तशायनम अय्यंगरः मैं अपने संशोधन पर जोर नहीं देना चाहता। मैं नहीं चाहता कि इस मुद्दे पर सदन विभाजित हो। मैंने विधि मंत्री के साथ परामर्श किया है और मैं समझता हूँ कि वे इससे सहमत हैं।
माननीय अध्यक्षः इसके अलावा, मुझे एक अन्य कठिनाई महसूस हो रही है, और वह यह है कि क्या फाइल की गई अपील को वापस लेने के प्रयोजन के लिए फ़ेडरल न्यायालय को प्रिवी कौंसिल से वरिष्ठ न्यायालय माना जा सकता है। यदि संशोधन द्वारा स्वयं वादकारी को बाध्य करने की ईप्सा की जाती तो यह भिन्न मामला होता किंतु यह धारा की पदावली का प्रश्न है।