5. फेडरल न्यायालय (अधिकारिता का विस्तार) विधेयक - Page 43

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

खंड 2 विधेयक में जोड़ा गया।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन, मैं खंड 3 के संबंध में, एक संशोधन प्रस्तुत करना चाहता हूँ। मेरा प्रस्ताव हैः

फ्कि खंड 3 मेंµ

(1) उपखंड (क) ( ii ) के अंत में ‘और’ शब्द का लोप किया जाए_

(2) उपखंड (ख) के रूप में निम्नलिखित अंतः स्थापित किया जाए_

(ख) ऊपर उल्लिखित ऐसी किसी अपील में, भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 205 की उपधारा (1) में उल्लिखित प्रकृति के किसी प्रश्न पर विचार करने के लिए फ़ेडरल न्यायालय सक्षम होगा_ और

(3) वर्तमान उपखंड (ख) को उपखंड (ग) के रूप में पुनः उक्त लेखबद्ध किया जाए।य्

माननीय अध्यक्षः मेरे विचार में यह एक सहमति प्राप्त संशोधन है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ, श्रीमन।

माननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गयाµ

फ्कि खंड-3 मेंµ

(1) उपखंड (क) ( ii ) के अंत में ‘और’ शब्द का लोप किया जाए_

(2) उपखंड (ख) के रूप में निम्नलिखित अंतः स्थापित किया जाए_

‘(ख) ऊपर उल्लिखित ऐसी किसी अपील में, भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 205 की उपधारा (1) में उल्लिखित प्रकृति के किसी प्रश्न पर विचार करने के लिए फ़ेडरल न्यायालय सक्षम होगा_’ और

(3) वर्तमान उपखंड (ख) को उपखंड (ग) के रूप में पुनः लेखबद्ध किया जाए।य्

ऽमाननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गयाः

फ्कि विधेयक के खंड 5 के पश्चात् निम्नलिखित नया खंड अंतः स्थापित किया जाए, अर्थात्ःµ

‘5क. नियत दिन के पश्चात्, सपरिषद महामहिम सम्राट के समक्ष उस दिन के पूर्व लंबित अपील का कोई भी पक्षकार फ़ेडरल न्यायालय में अपील को स्वयं अपनी फ़ाइल

ऽसं. स. (वि.) वा., खंड II, 11 दिसम्बर, 1947, पृष्ठ 1725