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ऽप्रांतीय दिवाला (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः श्रीमन, मैं प्रस्ताव पेश करता हूँः
फ्कि प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 का और आगे संशोधन करने के लिए विधेयक जारी रखा जाए।य्
माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गयाः
फ्कि प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 का और आगे संशोधन करने के लिए विधेयक जारी रखा जाए।य्
श्री राज कृष्ण बोस (उड़ीसाः साधारण) ः मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह विधेयक भी प्रवर समिति को भेजा गया था।
माननीय अध्यक्षः यह मात्र पुरःस्थापित किया गया था।
श्री के. सन्थानम् (मद्रासः साधारण)ः इसे नए सिरे से पुनः स्थापित किया जा सकता है। फ्जारी रखनेय् का क्या अर्थ है? यदि यह चर्चा के अन्य चरणों से गुजरा है या चयन समिति को निर्दिष्ट हुआ है, केवल तभी इसे जारी रखने के प्रस्ताव का कोई प्रयोजन है। इसे नए सिरे से भी पुरः स्थापित किया जा सकता है।
माननीय अध्यक्षः मैं माननीय सदस्य का ध्यान यथा अनुकूलित भारत शासन अधिनियम 1935 की धारा 30 के उपखंड (2) के उपबंधों की ओर आकर्षित करना चाहूँगाः
फ्किसी ऐसे विधेयक को, जो डोमिनियन की स्थापना के ठीक पूर्व भारतीय विधानमंडल की विधानसभा में लंबित था, किसी प्रतिकूल उपबंध के अध्यधीन रहते हुए, जो इस अधिनियम की धारा 38 के अधीन डोमिनियन विधानमंडल द्वारा बनाए गए, नियमों में सम्मिलित किए जा सकें, डोमिनियन विधानमंडल में वैसे ही जारी रखा जा सकेगा, मानो उक्त विधान सभा में विधेयक के निर्देश से की गई कार्यवाहियां, डोमिनियन विधानमंडल में की गई हों।य्
अतः पूर्व चरणों में उपगत समय और व्ययµप्रकाशन आदि को अब छूट दे दी गई है। विधेयक जारी रखने का यही प्रयोजन है।
श्री एम.एस. अनेय (दक्कन और मद्रास राज्य समूह)ः क्या मैं यह जान सकता हूँ कि अभी पढ़े गए विशिष्ट खंड के शब्दों को ध्यान में रखते हुए क्या यह
ऽसं. स. (वि.) वा., खंड I, 17 नवंबर, 1947, पृष्ठ 40-41