34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 554

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संशोधन सं. 389 है। मैं सोचता हूं कि ये तीन शब्द आवश्यक हैं, क्योंकि अन्यथा आप यह परिभाषित नहीं करते कि यह कौन-से निर्वाचन के बारे में हैं।

डॉ. अम्बेडकरः ‘निर्वाचन से अधिनियम’ के अधीन निर्वाचन अभिप्रेत है।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः आपका अभिप्राय उसी निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित निर्वाचन से है। तो आपको फ्अन्य मतदानों परय् कहना चाहिए।

उप-खंड इस प्रकार हैः

फ्अन्य मतदान केंद्र या स्थान जहां, और वह समय जिसके दौरान मतदान कराया जाएगा, नियत करें, और उस समय तक ऐसे निर्वाचन में पड़े मतों की गणना नहीं की जाएगी, जब तक वह स्थगित मतदान पूरा नहीं हो जाएगा।य्

फ्यहाँ..........अन्य मतदान केंद्रों पर ऐसा निर्वाचनय् बात को स्पष्ट करता है। अन्यथा यह भ्रमात्मक है।

श्री संथानमः फ्ऐसा निर्वाचनय् इसे अपने में समेटता है।

श्री अम्बेडकरः मैं यह नहीं समझता कि यह आवश्यक है।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्कि खंड 56, विधेयक का भाग हो गया है।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 56 विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 57 (नया मतदान)

श्री शिवचरण लालः श्रीमन्, मुझे अपने नाम से संशोधन सं. 390 को लाने की अनुज्ञा दी जाए?

माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री की प्रतिक्रिया जानना बेहतर होगा।

श्री शिवचरण लालः उसका उद्देश्य उप-खंड (1) में फ्किसी निर्वाचन मेंय् शब्दों के स्थान पर फ्मतों की गणना किए जाने से पूर्वय् शब्द रखना है।

श्री संथानमः यह किसी प्रक्रम पर हो सकता है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि यह आवश्यक है।