34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 555

540 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः मेरा संशोधन (301) है कि उप-खंड (1) में फ्पीठासीन अधिकारीय् शब्दों के पश्चात् फ्या उनकी ओर से कोई अन्य व्यक्तिय् शब्द अंतःस्थापित किए जाएँ। हो सकता है पेटियाँ रास्ते में हों, उन्हें किसी और स्थान पर रखा गया हो, वे किसी अन्य की अभिरक्षा में हों। ये बातें वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आ पाती हैं। अतः मैं समझता हूँ कि इन शब्दों को सम्मिलित करना आवश्यक लगता है।

श्री टी.टी. कृष्णामाचारी (मद्रास)ः अन्य शब्द जो उसके बाद हैं, इस प्रकार हैंः फ्कोई हेर-फेर या रद्दोबदल है या हैं......य्। यह स्थिति इसके अंतर्गत आ जाती है। अतः यह अनावश्यक है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि यह आवश्यक है।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्खंड 57, विधेयक का भाग गया है।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 57, विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 58, विधेयक में जोड़ा गया।

ऽश्री करुणाकरण मेननः मैं, फ्किसी विशिष्ट ढंग से मत देने के लिए किसी व्यक्ति को समर्थ बनानेय् लिए शब्दों पर बल देता हूँ।

डॉ. अम्बेडकरः यह खंड जैसा है, बिल्कुल ठीक है।

श्री शिवचरण लालः यदि माननीय विधि मंत्री यह नहीं समझते कि ये शब्द आवश्यक हैं, तो मैं इस पर बल नहीं देता हूँ।

संशोधन सं. 117 के संबंध में मैं पाता हूँ कि खंड 59(घ) इस प्रकार हैः फ्ऐसे किसी स्थिति की पत्नी, जैसा खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट है, जिस पर उक्त धारा 20 की उप-धारा (6) के उप-बंध लागू होते हैं।य् यहाँ मैं समझ नहीं पाता कि हम यह अधिकार पत्नी को क्यों दे रहे हैं।

डॉ. अम्बेडकरः क्योंकि हो सकता है वह उसके साथ हो।

माननीय अध्यक्षः मानों वह उनके साथ नहीं है, तो क्या उसे किसी अन्य रीति से मत देने का कोई अधिकार नहीं दिया जाए?

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 21 मई, 1951, पृष्ठ 9202