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यथासंशोधित खंड 157, विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 158, विधेयक में जोड़ा गया।
नया खंड 158क
डॉ. देशमुख (मध्य प्रदेश)ः श्रीमन्, मैं निम्नलिखित संशोधन अंतःस्थापित करने के लिए प्रस्ताव लाना चाहता हूँ। इंग्लैंड में, उनके पास इसके समान कोई उपबंध नहीं है। मैं पूछ रहा हूं किन्तु उन लोगों ने इस प्रयोजन के लिए आवास मंजूर करने को विनियमित करने के लिए कतिपय नियम विरचित किए हैं और उनसे किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हो रही है। अतः मैं आग्रह करता हूं कि इस संशोधन को स्वीकार किया जाए।
डॉ अम्बेडकरः मुझे डर है कि यह काफी कठिनाइयां पैदा करेगा और मैं यह संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूं।
माननीय उपाध्यक्षः आइए सर्वप्रथम मैं माननीय सदस्य से यह सुनिश्चित कर लूं क्या मेरे लिए सदन के समक्ष यह संशोधन रखना आवश्यक है।
डॉ. देशमुखः नहीं, किन्तु कुछ माननीय सदस्य बोलना चाहेंगे।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य ने अपना संशोधन प्रस्तुत कर दिया है और जैसा कि मैं इसे समझता हूं प्रक्रिया यह है कि यदि मैं इसे सदन के समक्ष रखता हूं, तो सदन को इस पर विचार करने का अवसर मिल जाता है। मैंने विधि मंत्री की प्रतिक्रिया के लिए कहा और उन्होंने कहा कि वे संशोधन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। और माननीय सदस्य ने ठीक ही कहा है कि इसे सदन के समक्ष रखना मेरे लिए आवश्यक नहीं है। यदि मैंने इसे सदन के सक्षम रखा, तो प्रत्येक सदस्य इस पर बात करने का हकदार है_ और इस स्थिति में माननीय सदस्य जिसने यह प्रस्ताव पेश किया है, सदन की इजाजत से इसे वापस ले सकते हैं।
डॉ. देशमुखः इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस सदन मे ऐसे अनेक माननीय सदस्य हैं जो इच्छुक हैं और जो हमारे द्वारा दिए गए तर्कों से प्रभावित हैं, उन्हें इस संशोधन पर बोलने की अनुज्ञा दी जानी चाहिए और तब...
पंडित ठाकुर दास भार्गवः श्रीमन् जी, यह गलत नजीर होगी। यदि इसे सदन के समक्ष नहीं रखा जाता है, तो इस पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।
श्री कॉमथ (मध्य प्रदेश)ः माननीय सदस्य ने संशोधन प्रस्तुत किया है, अतः इस पर चर्चा होनी चाहिए। जब कोई संशोधन लाया जाता है तो सदन को इस पर विचार करना चाहिए।