9. दंड विधि (संशोधन) विधेयक - Page 63

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽदंड विधि संशोधन विधेयक

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं, दंड विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 का और संशोधन करने के लिए एक विधेयक पुरःस्थापित करने की इजाज़त का प्रस्ताव करना चाहता हूँ।

अध्यक्ष महोदयः प्रश्न यह हैः

फ्कि दंड विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 का और संशोधन करने के लिए विधेयक पुनः स्थापित करने की इजाज़त प्रदान दी जाए।य्

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

डॉ. अम्बेडकरः मैं विधेयक पुनः स्थापित करता हूँ।

ऽऽदंड विधि संशोधन विधेयक

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मुझे प्रस्ताव पेश करने इजाजत दी जाएः

फ्कि दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश, 1944 का और आगे संशोधन करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्

(श्रीमती दुर्गा बाईµपीठासीन)

इस प्रस्ताव का उद्देयय 1950 के अध्यादेश सं. III को प्रतिस्थापित करना है जिसे दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश, 1950 कहा जाता है। 1950 का यह अध्यादेश संख्या III, 1944 मूल अध्यादेश XXXVIII में एक नई धारा 9-क जोड़ने के लिए पारित किया गया था। यह समझने के लिए कि 1950 का अध्यादेश III वास्तव में क्यों अधिनियमित किया गया था, माननीय सदस्यों के लिए 1944 के इस अध्यादेश सं. XXXVIII का इतिहास सहायक हो सकता है।

युद्ध के दौरान, भारत सरकार और विभिन्न प्रांतों की सरकारों ने लोक संपत्ति और लोक निधियां, ठेकेदारों और सरकार के अधिकारियों जैसे कुछ व्यक्तियों के हाथों में सौंप दी थीं। यह पता चला कि उनमें से कुछ व्यक्तियों ने जिन्हें सरकारी संपत्ति और निधियां सौंपी गई थीं_ कुछ गबन किए थे ओर परिणामतः अपचारियों के विचारण के लिए 1944 का अध्यादेश XXXVIII पारित किया गया था जिसके अधीन इन अपराधियों

ऽसं. वा., खंड-2, भाग II, 14 फरवरी, 1950, पृष्ठ 538

ऽऽउपरोक्त, 28 फरवरी, 1950, पृष्ठ 983-84