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स्थगन के लिए प्रस्ताव
हैदराबाद के मीर लायक अली का अभिरक्षा से निकल भागना
ऽमाननीय अध्यक्षः जहां तक मीर लायक अली और अन्य व्यक्तियों के अभियोजन का संबंध है, क्या मैं जान सकता हूँ कि नियंत्रण प्राधिकारी या निदेशन प्राधिकारी कौन हैं?
सरदार पटेलः अंतिम अभियोजन मंजूरी निज़ाम से लेनी होती है।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं नहीं जानता, किंतु इस मामले के संबंध में मेरी प्रथम धारणा यह है कि हैदराबाद किसी अन्य राज्य की ही तरह है। संविधान के अधीन हैदराबाद राज्य के केन्द्र के साथ संबंध में और उदाहरण के लिए, बंबई के केन्द्र के साथ संबंध में कोई अंतर नहीं है, जिसका यह अर्थ है कि सूची II में अधिकथित विषयों के संबंध में पूरा दायित्व राज्य का है और जहां तक सूची I में अधिकथित विषयों का संबंध है, यह केन्द्र का दायित्व है। यही नियम हैदराबाद पर लागू होगा। कहने का तात्पर्य यह है कि जहाँ तक लायक अली की अभिरक्षा का संबंध है यह एक विधि और व्यवस्था का विषय है जो संविधान के अधीन निस्संदेह रूप से स्थानीय प्रशासन का विषय है। इस आधार पर मेरा निवेदन है कि यह ऐसा विषय नहीं है जिसे संविधानिक रूप से केन्द्रीय सरकार के नियंत्रणाधीन समझा जा सके, बल्कि मैं एक और टिप्पणी जोड़ना चाहूंगा, अर्थात् इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वहाँ स्थानीय विधानमंडल नहीं है जिसके प्रति स्थानीय मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया जा सके, यह संभव है, मेरे वक्तव्य में सुधार किया जा सकेµकि स्थानीय प्रशासन द्वारा जो भी कार्यवाही की जा रही है, वह संभवतः उस शक्ति के अधीन की जा रही है जो संविधान कतिपय राज्यों के अनुसार निदेशन और नियंत्रण के लिए केन्द्रीय सरकार में निहित है। मुझे अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि संविधान के इस भाग के अंतर्गत क्या स्थिति है। किंतु जहां तक संविधान का संबंध है और हैदराबाद राज्य के केन्द्र से संबंधों का प्रश्न है, मैं निवेदन करता हूँ कि यह मामला विधि और व्यवस्था के अंतर्गत आएगा जो सर्वथा राज्य का विषय है।
ऽऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन्, मैं आपका आभारी हूँ कि आपने स्थगन प्रस्ताव पर कल किए गए वाद-विवाद के दौरान मेरे द्वारा और इस सदन के अन्य सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों को और स्पष्ट करने तथा व्याख्या करने के लिए मुझे दूसरा अवसर प्रदान किया। चूंकि, मेरी टिप्पणियाँ प्रारम्भ होने से पूर्व आपने यह बहुत अच्छा किया कि उन कठिनाइयों से मुझे अवगत करा दिया, जो आपको महसूस हुइंर्,
ऽसं वा., खंड 2, भाग II, 7 मार्च, 1950, पृष्ठ 1179-80
ऽऽसं. वा., खंड 2, भाग II, 8 मार्च, 1950, पृष्ठ 1236-44