86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
| v | kns'k |
|---|
पश्चिमी बंगाल आदेश
डॉ. अम्बेडकर : मैं परिषद निर्वाचन क्षेत्र (पश्चिमी बंगाल) परिसीमन आदेश, 1951 के लिए सर्वश्री सामंत और अब्दुसत्तार के नामों में सूची सं. 2 में संशोधन सं. 2 को स्वीकार करता हूँ।
श्री चट्टोपाध्याय (पश्चिमी बंगाल) : किए गए करार को ध्यान में रखते हुए मैं सदन से अपने संशोधन को वापिस लेने की इजाजत चाहता हूँ। किंतु इससे पूर्व कि आप सदन में प्रस्ताव रखें मेरे संदेह को स्पष्ट किया जाना है जो स्थानीय प्राधिकरणों के नामनिर्देशित सदस्यों के मामले से संबंधित है। इस संसद या संविधान सभा की कभी भी यह इच्छा नहीं रही है कि नामनिर्देशित सदस्यों को परिषदों के निर्वाचनों के मामले में मत देने का कोई अधिकार होना चाहिए। हमने संविधान में यह उपबंध किया है कि केंद्र तथा राज्यों में ऊपरी सदनों के नामनिर्देशित सदस्यों का चर्चा के अधीन इस निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए मत देने का अधिकार नहीं होना चाहिए। दो नगर पालिकाएं चर्चाधीन हैं जिनके सदस्यों की कुल संख्या 24 है, जो सभी नामनिर्देशित हैं और यदि उन्हें परिषद के निर्वाचन के मामले में मत देने का अधिकार प्राप्त हो, तो मैं सोचता हूँ बंगाल राज्य में परिषद कुछ तमाशे की तरह हो जाएगी क्योंकि नामनिर्देशित सदस्यों द्वारा निर्वाचित परिषद के सदस्य चुने गए सदस्यों द्वारा भेजे गए प्रतिनिधियों के बराबर होंगे। संसद या संविधान सभा की कभी भी यह इच्छा नहीं रही है कि स्थानीय निकायों के नामनिर्देशित सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचन के मामले में या परिषदों के निर्वाचन के मामले में मत देने का कोई अधिकार हो। यह असावधानी के कारण है कि इतनी गंभीर प्रकष्ति की गलती हो गई और मैं यह जानना चाहूँगा कि क्या गलती को ठीक करने के लिए कुछ किया जा सकता है?
डॉ. अम्बेडकर : मैं अपने माननीय मित्र द्वारा उठाए गए प्रश्न की महत्ता को देखता हूँ किंतु कठिनाई सांविधानिक कठिनाई है। संविधान नाम निर्देशित सदस्यों और निर्वाचित सदस्यों के बीच कोई अंतर नहीं करता है। यद्यपि मैं अपने मित्र की इस बात से सहमत हूँ कि संविधान सभा का आशय नामनिर्देशित सदस्यों को निर्वाचन में भाग लेने की अनुज्ञा देने का नहीं था, क्योंकि यह मामला संविधान सभा के ध्यान में नहीं लाया गया था, इसलिए हमारे लिए उस समय तक कुछ करना असंभव है, जब तक संविधान का संशोधन न हो जो कि एक असंभव प्रतिपादना का रास्ता है।
श्री चट्टोपाध्याय : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या निर्वाचन में मतदाता होने से ऐसे सदस्यों को विवर्जित करने के लिए राज्य सरकार कुछ कर सकती है और