41. निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में प्रस्ताव - Page 105

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गृह मंत्री (श्री राजगोपालाचारी) : विधि मंत्री का तात्पर्य यह है कि उन्हें परिषद

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से हटा दिया जाए-वे उन्हें संविधान के अधीन उनके कृत्यों से नहीं हटा सकते।

डॉ. अम्बेडकर : नहीं, नहीं।

माननीय उपाध्यक्ष : जब तक वे नगरपालिकाओं के सदस्य हैं, संविधान के अधीन नामनिर्देशित सदस्य मत देने के हकदार हैं। सुझाव यह नहीं है कि एक रात में संविधान में परिवर्तन किया जाए। सुझाव यह है कि यदि वे सभी विद्यमान नगरपालिकाओं को भंग करके और निर्वाचन होने से पूर्व सभी सीटों को निर्वाचन द्वारा भरे जाने के लिए अनुज्ञात करते हुए नगरपालिकाओं से संबंधित वर्तमान विधि में परिवर्तन करें तो इससे प्रयोजन पूरा हो जाएगा। किंतु क्या हम सदन के समक्ष अब सुझाव दे रहे हैं कि क्या किया जाना चाहिए? हम आगे बढ़ें। हमारे पास बहुत कम समय बचा है। हमारे हाथ में निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन आदेश का मामला है। मैं समझता हूँ कि प्रधानमंत्री को उस समय तक परेशान नहीं किया जाना चाहिए जब तक वह स्वयं करना न चाहें। हमें अपने विधिसम्मत कार्य के लिए अग्रसर होना चाहिए।

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मैसूर आदेश

* माननीय उपाध्यक्ष : हमारे सामने सूची सं. 1 संशोधन है।

श्री शंकरय्या (मैसूर) : इससे पूर्व कि इसे सदन में मत के लिए रखा जाए, मैं माननीय मंत्री को इस बात पर विचार करने का सुझाव देना चाहूँगा कि स्तंभ 2 में राजस्व‘‘ शब्द का लोप करने के बजाए उसे कोष्ठक में रखने के लिए अनुज्ञात किया जा सकता है; इसका परिणाम भी वही होगा। शब्द को हटाना या कोष्ठकों में रखना व्यावहारिक रूप से एक ही बात होगी। इसे कोष्ठकों में रखने से यह और अधिक स्पष्ट एवं प्रामाणिक होगा।

डॉ. अम्बेडकर : यह विशुद्धतः प्रशासनिक मामला है और हम मैसूर सरकार से प्राप्त सलाह पर कार्यवाही कर रहे हैं कि यदि ‘‘राजस्व’’ शब्द रखा जाता है तो इससे कुछ जटिलताएं हो सकती हैं या भूल उत्पन्न हो सकती है। उसको ध्यान में रखते हुए मैं इस संशोधन का समर्थन करता हूँ। माननीय उपाध्यक्ष : प्रश्न है :-

कि 20 सितंबर, 1951, को पटल पर रखे गए परिषद निर्वाचन क्षेत्र (मैसूर)

* संसदीय वाद-विवाद, जिल्द-14, भाग- II, 11 अक्तूबर, 1951, पृ. 4629-41