56. जनजातीय ईसाई और आम चुनाव - Page 186

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770 श्री एस. सी. सामंत : विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :

(क) क्या जनजातीय ईसाईयों (आदिवासियों) को आगामी आम चुनावों में अनुसूचित जनजातीय निर्वाचन-क्षेत्रों से अनुसूचित जनजातीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाएगा; और

(ख) यदि किसी प्रकार कोई रोक नहीं है तो क्या उनके चुनावों को प्रश्नगत किया जाएगा और चुनाव अधिकरणों में चुनाव विवाद के रूप में उठाया किया जाएगा?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) माननीय सदस्य मुझसे लोक प्रतिनिधित्व

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अधिनियम, 1951 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में सन्निहित संगत वैधानिक उपबंधों की व्याख्या करने को कह रहे हैं। जो उम्मीदवार किसी राज्य में अनुसूचित जन-जाति के लिए आरक्षित सीट के लिए खड़ा होता है तो यह जरूरी है कि वह राष्ट्रपति के अनुसूचित जनजाति संबंधी आदेशों में दी गई सूची के अनुसार अनुसूचित जनजाति का सदस्य हो। मैं यह नहीं कह सकता कि प्रश्न में जिस ‘‘जनजातीय ईसाईयों’’ का उल्लेख किया गया है वह किसी अनुसूचित जनजाति का सदस्य है अथवा नहीं।

प्रश्न के ‘ख’ भाग के संदर्भ में, माननीय सदस्य का ध्यान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 की ओर दिलाया जाता है जिसमें वे आधार दिए गए हैं जिन के आधार पर किसी चुनाव को प्रश्नगत किया जा सकता है। वे विशेष से रूप से उपधारा (1), खण्ड ‘ग’ को देखने का कष्ट करें।

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* संसदीय वाद-विवाद, खंड-9, भाग- I, 4 सितम्बर, 1951, पृ. 972