55. निर्वाचन-क्षेत्रों के मानचित्र - Page 185

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करते हैं कि सरकार एक माह अथवा दो माह में तो ऐसा कर पाने में समर्थ होगी। तीन उŸारों में से एक भी उŸार सुस्पष्ट नहीं है।

डॉ. अम्बेडकर : इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

प्रो. रंगा : उपाध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात पर आपिŸा है कि कोई भी मंत्री खड़ा होकर हमसे यह कहे कि जाओ मेरे किसी अधीनस्थ से सूचना प्राप्त कर लो, यह तो वास्तव में संसद की गरिमा का अनादर है।

माननीय उपाध्यक्ष : मुझे ऐसा लगता है कि माननीय मंत्री के कहने का आशय केवल यह था कि सूचना केवल सरकारी स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार के मुद्दों के संबंध में सदन का समय लेने से पूर्व उन्हें उपलब्ध जानकारी को हासिल कर लेना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर : मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि मेरे माननीय मित्र प्रो. रंगा अन्य अनेक अवसरों पर भी अधिकारियों से मिले हैं और उन्होंने गरिमा को ठेस लगने जैसी बात महसूस नहीं की।

प्रो. रंगा : इस प्रकार का उŸार देने से एक और विवाद खड़ा हो जाएगा। हम जा भी सकते हैं और नहीं भी जा सकते। लेकिन सूचना मांगे जाने पर मंत्री महोदय हमसे यह नहीं कह सकते कि हमें उनसे सूचना प्राप्त करने के स्थान पर उनके अधीनस्थ अधिकारी से सूचना प्राप्त करनी चाहिए।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यदि सदस्य उनके अधीनस्थ अधिकारियों के पास सूचना लेने के लिए गए तो क्या यह प्रश्न सदस्यों की गरिमा के सवाल के अलावा स्वयं माननीय मंत्री को बुरा नहीं लगेगा?

माननीय उपाध्यक्ष : अब मैं दूसरे प्रश्न पर आऊंगा। सदन में आने से पूर्व पुस्तकों और अधिकारियों को निर्देशित करना एक आम बात है।

श्री ए. सी. गुहा : हमें एक परिपत्र जारी किया गया है कि हमें अधिकारियों से जाकर नहीं मिलना चाहिए। मंत्री महोदय कैसे हमें यह कह सकते हैं कि अधिकारी के पास जाकर सूचना ले लें। सूचना देने का काम मंत्री का है।

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