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1069 पंडित कुंजरू : विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :
(क) क्या चुनाव आयोग ने बंबई राज्य सरकार अथवा जिला मजिस्ट्रेट को मतदान केन्द्रों की सूची तैयार करने को कहा था और ये निर्देश दिए थे कि इन सूचियों के अंतिम रूप से तैयार हो जाने तक इन्हें किसी भी पार्टी को न दिखाया जाए;
(ख) क्या बंबई सरकार ने चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद जिला मजिस्ट्रेटों में से किसी एक को ये निर्देश दिए हैं कि प्रारंभिक सूचियाँ ग्रामीण विकास बोर्डों के उपाध्यक्षों को दिखा दी जाएं;
(ग) क्या ये उपाध्यक्ष जिला कांग्रेस समितियों के सदस्य हैं और अनेक मामलों में उनके अध्यक्ष भी हैं; और
(घ) यदि उपर्युक्त (क) और (ख) का उŸार हाँ है, तो सरकार द्वारा इन मामले में क्या कार्यवाही की जानी प्रस्तावित है?
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) जी नहीं, श्रीमान। निर्वाचन आयोग ने ऐसे कोई
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निदेश जारी नहीं किए हैं जिनमें यह कहा गया हो कि मतदान केन्द्रों की सूची के अंतिम रूप से अनुमोदन के पूर्व इन्हें किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दिखाया जाए बल्कि निर्वाचन आयोग ने तो इसके उलट राज्य सरकारों को सुझाव दिए हैं कि वे मतदान केन्द्रों से संबंधित अपनी प्रारंभिक योजनाओं को विभिन्न दलों को उपलब्ध कराएं और जितना भी जयादा से ज्यादा संभव हो, इनका प्रचार करें। सूचना के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य सरकारों को दिनांक 26 मई, 1951 को भेजी गई चिट्ठी की प्रति सदन पटल पर रखी जाती है (देखें VII, उपाबंध 9)
(ख) बंबई सरकार ने कलेक्टरों को निदेश दिए हैं कि उन्हें सरकार द्वारा यथा अनुमोदित प्रारंभिक योजनाओं को राजनीतिक दलों और जनता को दिखाया जाना
* संसदीय वाद-विवाद, खंड-9, भाग- I, 17 सितम्बर, 1951, पृ. 1273