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(छ)
निरसन और संशोधन विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री) : महोदय, मैं प्रस्ताव करता
हूँः-
‘‘कि कतिपय अधिनियमों का निरसन अथवा संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
महोदय मैं नहीं समझता कि इस समय कोई वक्तव्य देना आवश्यक है क्योंकि यह तो एक नैमित्तिक कार्य है। कई अधिनियम तो युद्धकाल में पारित किए गए थे और उन अधिनियमों के अंतर्गत दी गई शक्तियाँ समाप्त हो गई हैं तथा उनमें से कुछ तो समाप्त हो गए हैं जरूरी बात तो यह है कि इन अधिनियमों से स्टेट्यूट बुक इतनी भारी बोझिल हो गई है उसे कांट-छांट कर छोटा कर दिया जाए। महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ।
अध्यक्ष महोदय : प्रस्ताव प्रस्तुत किया गयाः-
‘‘कि कतिपय अधिनियमों का निरसन या संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
श्री एम. अनन्तशयनम आयंगर (मद्रास : साधारण) : महोदय मैं आपका समय नहीं लेना चाहता लेकिन मुझे खेद है कि उन्होंने भारत सरकार के लगभग डेढ़ सौ अधिनियमों की सूची में वृद्धि नहीं की है।
अध्यक्ष महोदय : प्रश्न यह है :-
‘‘कि कतिपय अधिनियमों का निरसन करने अथवा उनमें संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
प्रस्ताव अंगीकृत हुआ।
खण्ड 2 से 4 विधेयक में जोड़े गए।
अनुसूची विधेयक में जोड़ी गई।
* संविधान सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड-3, भाग- II, 11 दिसम्बर, 1947, पृ. 1727