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( ii ) संविधान (कठिनाइयों का दूर किया जाना) आदेश संख्या ( v ) (राष्ट्रपति
द्वारा 6 जून, 1950 को किया गया)
(ग्रंथालय में रख दिया गया, देखिए संख्या पी. 93/50)
* विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मुझे सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 का और आगे संशोधन करने वाले विधेयक को प्रस्तुत करने की अनुमति देने की कृपा की जाए। माननीय उपाध्यक्ष : प्रश्न यह है :-
‘‘कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का और संशोधन करने वाले विधेयक को प्रस्तुत करने की अनुमति देने की कृपा की जाए।’’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
डॉ. अम्बेडकर : मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूँ।
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(ठ)
संविधान (कठिनाइयों का दूर किया जाना) आदेश संख्या ( ii ) (तीसरा संशोधन) आदेश
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मैं राष्ट्रपति द्वारा 16 अगस्त, 1951 को किए गए
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संविधान (कठिनाइयों का दूर किया जाना) आदेश संख्या ( ii ), (तीसरा संशोधन) आदेश 1951 की प्रति संविधान के अनुच्छेद 392 के खण्ड (2) के अधीन सदन की पटल पर रखता हूँ।
(ग्रंथालय में रख दिया गया, देखिए संख्या पी. 197/51)।
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हजार वर्ष पुरानी है - कुछ लोग इस कालावधि से संतुष्ट नहीं हैं, वे इसे और अधिक पुरानी मानते हैं- इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता- 6 हजार वर्ष पुरानी ही मान लेते हैं- इतने समय में 5 करोड़ अस्पृश्य लोग पैदा हुए हैं, लगभग दो करोड़
* संसदीय वाद-विवाद, खंड- 7, भाग- II, 18 दिसम्बर, 1950, पृ. 1835
** संसदीय वाद-विवाद, खंड- 14, भाग- II, 27 अगस्त, 1951, पृ. 1363