लोकसभा - डॉ. अम्बेडकर का निधन - Page 276

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है। लेकिन आवश्यक रूप से यथास्थिति में अन्याय के विरुद्ध विद्रोही थे। चाहे वह अन्याय सामाजिक क्षेत्र का हो या आर्थिक क्षेत्र का हो ।

अंत में, अधिक प्रगतिशील तरीकों पर सोचते रहते थे। अभी हाल में मैंने उनसे कुछ चर्चा की थी और उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जातियों को और विशेषाधिकार नहीं दिये जायें, अब उन्हें खुद आगे आना चाहिए और सम्पूर्ण भारतीय समुदाय के शेष सदस्यों के साथ अन्याय से लड़ना चाहिए जो अभी विद्यमान हैं। इस प्रकार के व्यक्ति का निधन हो गया है लेकिन इस संसार में प्रत्येक वस्तु नश्वर है।

इसलिए जो कुछ अच्छे कार्य उन्होंने किये हमें उन्हें याद रखना चाहिए और उन्होंने प्रगतिशीलता रूप से जो प्राप्त किया और जिसे करने का उनका उद्देश्य था इसके लिए वे स्मरणीय हैं।

इस सदन के दूसरे सदस्यों ने जो भावनाएं व्यक्त की हैं मैं स्वयं उनकी भावनाओं के साथ हूँ।

माननीय अध्यक्ष : सदन के नेता तथा विभिन्न ग्रुपों के नेताओं ने सदन में जो भी

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विचार व्यक्त किये हैं, मैं उनसे सहमत हूँ। मुझे विश्वास है कि सदन भी उन विचारों को उतना ही सहयोग देगा। डॉ. अम्बेडकर एक महान् और प्रगतिशील व्यक्ति थे। उन्होंने नीचे से शुरूआत की थी और अनुसूचित जाति के नेता हो गये। वे एक महान् विद्वान और लेखक थे और इससे भी अधिक वे एक प्रभावशाली वक्ता थे।

उन्होंने हमारे संविधान का मार्गदर्शन किया। समाज सुधार के क्षेत्र में उन्होंने बहुत से हितकारी उपाय शुरू किये। उनके निधन से भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया हैः मैं इस सदन की भावनाओं तथा संवेदना को उनके शोक सन्तप्त परिवार को भेज दूंगा।

सम्मान के रूप में मुझे विश्वास है कि सदन आज सम्भवतया स्थगित रहेगा। उनके दुख में हम खड़े होकर एक मिनट मौन धारण करेंगे।

तत्पश्चात् सदस्य एक मिनट के लिए मौन खड़े हुए।

माननीय अध्यक्ष : अब सदन उन्हें सम्मान देने के लिए स्थगित होगा और कल

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पुनः 11 बजे समवेत होगा।

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