लोकसभा - डॉ. अम्बेडकर का निधन - Page 275

258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आत्मा में कुछ हद तक कठोरपन आ गया था और उस सीमा तक कड़वाहट यदि न्यायोचित नहीं है, तो वे कम से कम समझने योग्य है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि डॉ. अम्बेडकर ने विनम्रता से शुरूआत की लेकिन उनका नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा और मुझे विश्वास है कि केवल उनकी जाति के लोगों को ही नहीं, बल्कि देश को इस महान् सपूत पर गर्व होगा। मैं आपसे यह आग्रह करूंगा कि आप मेरी संवेदना को उनके परिवार के लोगों को पहुंचा दें।

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आज का दिन सम्पूर्ण भारत के लिये विशेष करके हम हरिजनों के लिए बड़ा दुखद और अंधकार का दिन है। डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर भारत के बड़े महान नेता थे और उन्होंने देश की कई रूपों में सेवा की है। देश के वे महान नेता थे ही लेकिन हम हरिजनों के तो वे प्राण थे और हरिजन सदा उनके ऋणी रहेंगे। उन्होंने जिन्दगी भर हरिजनों को ऊपर उठाने के लिए प्रयत्न किया और आज के दिन हरिजनों की जो अवस्था में सुधार हुआ है और हम कुछ ऊपर उठे हैं, उसका मुख्य श्रेय बाबासाहेब को ही है। बाबासाहेब का जन्म एक गरीब अछूत घराने में हुआ था और उनको अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने सफलतापूर्वक सारी कठिनाइयों का सामना किया और उन पर विजय पाई। उन्होंने जीवन भर इस अस्पृश्यता के कलंक को हिंदू जाति के माथे पर से हटाने का प्रयत्न किया और अस्पृश्यता निवारण के लिए घोर संग्राम किया। आखिर उन्होंने हिंदू धर्म को जो कि अस्पृश्यता को मानता है अपना धर्म नहीं मानूंगा और हमने देखा कि उन्होंने अपनी यह प्रतिज्ञा पूरी भी की। भगवान से मेरी प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। और मैं समझता हूँ कि उनकी आत्मा को सच्ची और वास्तविक शांति तभी मिलेगी जब यह अस्पृश्यता का कलंक हिन्दू जाति से मिट जाएगा।

श्री गाडगिल (पूना मध्य) : सदन के नेता और मेरी पार्टी के बोलने के पश्चात्

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साधारणतया मेरे बोलने का कोई औचित्य नहीं है लेकिन मैं इस औचित्य की वकालत करता हूँ कि मुझे 35 से भी अधिक वर्ष तक डॉ. अम्बेडकर का मित्र रहने का सौभाग्य प्राप्त है। वे जितने देश को प्यारे थे उस की तुलना में वे हम महाराष्ट्रियनों को दस गुना ज्यादा प्रिय थे। वही व्यक्ति थे जिन्होंने हमारे क्षेत्र में अत्यधिक पद-दलित जातियों में आत्मसम्मान और गौरव की भावना पैदा की। निःसंदेह उनकी भाषा बहुत कड़वी थी। लेकिन दिल उनका बहुत कोमल था। उनकी गलतियों को हम सभी जानते हैं, लेकिन उनके गुण उनकी गलतियों से अधिक हैं।

उन्होंने हमारे संविधान की रचना करने के मामले में जो कुछ किया, वह सर्वविदित