(6) हिंदू धर्मार्थ तथा धार्मिक न्यासों द्वारा आय का गबन - Page 286

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397 डॉ. पी. एस. देशमुख : (क) क्या माननीय विधि मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे :-

(क) क्या सरकार को हिंदू धर्मार्थ तथा धार्मिक न्यासों से आय की बर्बादी और गबन की मात्रा की जानकारी है?

(ख) क्या सरकार का इन सभी न्यासों को समाप्त करने के लिए विधान पुरःस्थापित करने के औचित्य पर विचार करने का प्रस्ताव है ताकि सम्पत्तियों का राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य में उपयोग किया जा सकें?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : (क) नहीं महोदय, (ख) नहीं महोदय। इस

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प्रश्न को बिल्कुल छोड़कर कि क्या सभी हिंदू धर्मार्थ और न्यासों को समाप्त करने का विधान आवश्यक या वांछनीय है इस प्रकार का धार्मिक विधान प्रांतीय विधायी सूची की प्रविष्टि 34 के अन्तर्गत प्रांतीय क्षेत्र के भीतर आता है और केन्द्रीय सरकार इसलिए सुझाए गए विधान पर पहल नहीं कर सकती है।

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* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड- 1, भाग- I, 27 नवम्बर, 1947, पृ. 781