44. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव - Page 321

èk U; o kn
i zL r ko
(44)
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव

* माननीय सभापति : मैं इतना ही कह सकता हूँ कि कुछ ऐसे संशोधनों की सूचना दी गई है जिन पर राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित मामलों के संबंध में किसी भी प्रकार से कोई चर्चा नहीं की जा सकती। राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित कुछ विषय जैसे खाद्य उत्पादन, भू-राजस्व, विदेश-नीति और निराधात्मक नजरबंदी है उनसे संबंधित संशोधन प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

श्री एच. पी. सक्सेना (उत्तर प्रदेश) : क्या प्रस्तुत किए गए सभी संशोधन स्वीकृत हो गए हैं या नहीं?

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बंबई) : अस्थायी संसद में जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह इस प्रकार है। संभवतः यह कोई नई बात नहीं है, जबसे संविधान प्रवर्तन में आया है, गत दो या तीन वर्षों से यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जहाँ तक मुझे स्मरण है निचले सदन के अनेक सदस्य बैठे हुए हैं और वे मेरी भूल को सुधार सकते हैं-लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा यह प्रक्रिया अपनाई गई है कि वह आरंभ में सभी संशोधनों को प्रस्तुत करने की अनुमति देते हैं। निःसंदेह वे संशोधन ऐसे ही होते हैं जिनको स्वीकार किया जा सकता है। तत्पश्चात् वह विभिन्न संशोधनों के प्रस्तावक सदस्यों को अपने संशोधनों के समर्थन में भाषण देने के लिए आमंत्रित करते हैं? सामान्यतः यही समझा जाता था कि चूंकि किसी व्यक्ति ने अपना संशोधन प्रस्तुत किया है उसका इतना कर देने से अनिवार्य रूप से बोलने का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। परंतु अध्यक्ष महोदय इस बात को ध्यान में रखकर कि कुछ सदस्यों ने संशोधन प्रस्तुत करने का अपना इरादा बताया है, उन्हें भाषण देने की अनुमति दे देते हैं। उन्होंने, इस प्रक्रिया को अपनाया है। मेरे विचार में, वही प्रक्रिया इस सदन में भी अपनाई जानी चाहिए।

एक अन्य टिप्पणी के संबंध में, मैं पूरे आदर के साथ कहना चाहूँगा कि हाउस आफ कॉमन्स में क्या होता है, उसका उल्लेख करते हुए आपने बताया कि राष्ट्रपति

* संसदीय वाद-विवाद (राजय सभा), जिल्द- 1, 1 मई, 1952, पृ. 801-81