खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 107

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हो, मुसलमान समुदाय के सदस्यों और अन्य अल्पसंख्यकों को पर्याप्त संख्या में समझौते द्वारा शामिल किया जाएगा।

  1. अल्पसंख्यक समुदायों के संरक्षण और उनके कल्याण में संवर्धन के लिए केंद्र और प्रांतीय सरकार के अधीन सांविधिक विभाग होंगे।

  2. नामांकन अथवा निर्वाचन के माध्यम से किसी विधानमंडल में इस समय प्रतिनिधित्व का लाभ ले रहे सभी समुदायों का पृथक मतदाताओं के माध्यम से सभी विधानमंडलों में प्रतिनिधित्व होगा और अल्पसंख्यकों का उपबंध में निर्धारित अनुपात से कम नहीं होगा, परंतु किसी बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक अथवा यहां तक कि बराबरी में भी नहीं लाया जाएगा बशर्ते कि दस वर्ष बीतने के बाद पंजाब और बंगाल में मुसलमानों को और अन्य किसी प्रांत में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए संबंधित समुदाय की सहमति से संयुक्त मतदाताओं अथवा सीटों के आरक्षण के साथ संयुक्त मतदाताओं को स्वीकार करने की छूट होगी। इसी प्रकार, दस वर्ष बीतने के बाद केंद्रीय विधानमंडल में किसी अल्पसंख्यक के लिए, संबंधित समुदाय की सहमति से सीटों के आरक्षण सहित अथवा रहित संयुक्त मतदाताओं को स्वीकार करने की छूट होगी।

दलित वर्गों के संबंध में, 20 वर्ष बाद पृथक मतदाताओं के अनुभव होने और समुदाय के लिए प्रत्यक्ष प्रौढ़ मताधिकार स्थापित होने तक संयुक्त मतदाताओं और आरक्षित सीटों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

  1. प्रत्येक प्रांत में और केंद्र सरकार के संबंध में एक लोक सेवा आयोग नियुक्त किया जाएगा, और गवर्नर जनरल और गवर्नरों द्वारा नामांकन द्वारा भरे जाने के लिए आरक्षित अनुपात, अगर कोई हो, को छोड़कर, लोक सेवाओं में ऐसे आयोग के माध्यम से ऐसे तरीके से भर्ती की जाएगी ताकि दक्षता और आवश्यक अर्हता रखने के शर्त के अनुसार विभिन्न समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके। भर्ती के संबंध में अनुदेशों की लिखित में गवर्नर-जनरल और गवर्नरों को इस सिद्धांत को प्रभावी बनाने और उस प्रयोजनार्थ सेवाओं की संरचना की आवधिक रूप से समीक्षा करने के लिए अनुदेश समाविष्ट होंगे।

  2. अगर कोई विधेयक पारित किया जाता है, जो किसी समुदाय विशेष का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी विधानमंडल के दो-तिहाई सदस्यों की राय में उनके धर्म अथवा धर्म पर आधारित सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है अथवा व्यक्तियों के मूल अधिकारों के मामले में अगर एक-तिहाई सदस्य आपत्ति करते हैं तो ऐसे सदस्य उसके लिए सदन द्वारा पारित विधेयक पर महीने की अवधि के भीतर