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के प्रावधानों को अल्पसंख्यक समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन का पाठ निम्नानुसार है - संपादक।
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मुसलमानों, दलित वर्गों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन और यूरोपीय लोगों
द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत सांप्रदायिक समस्या के निपटारे के लिए प्रावधान
अल्पसंख्यक समुदायों का दावा
किसी भी व्यक्ति से उसकी उत्पत्ति, धर्म, जाति अथवा वर्ग के कारण सरकारी रोजगार, अधिकार, या सम्मान के पद के संबंध में अथवा उसके नागरिक अधिकारों का लाभ लेने और कोई व्यापार करने के संबंध में कोई पक्षपात नहीं किया जाएगा।
किसी समुदाय को प्रभावित करने वाले भेदभावपूर्ण विधानमंडल के अधिनियम के विरुद्ध संरक्षण की दृष्टि से संविधान में सांविधिक रक्षोपाय सम्मिलित किए जाएंगे।
लोक व्यवस्था और नैतिकता बनाए रखने के अधीन रहते हुए सभी समुदायों को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता अर्थात् आस्था, पूजा करने, प्रचार करने, सहयोग और शिक्षा देने की पूर्ण स्वतंत्रता की गारंटी दी जाएगी।
आस्था के परिवर्तन मात्र से कोई भी व्यक्ति अपना नागरिक अधिकार अथवा विशेषाधिकार नहीं खोएगा अथवा किसी शास्ति के अधीन नहीं होगा।
स्वयं अपने खर्च पर खैराती धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं, स्कूल और अन्य शैक्षणिक प्रतिष्ठान, उनमें अपने धर्म के प्रयोग के अधिकार सहित, स्थापित करने, प्रबंध करने और नियंत्रण रखने का अधिकार।
संविधान में अल्पसंख्यक समुदायों के धर्म, संस्कृति और वैयक्तिक कानून के संरक्षण और शिक्षा, भाषा, खेराती संस्थाओं के संवर्धन तथा राज्य और स्व-शासी निकायों द्वारा दिए गए सहायता-अनुदान में उनका विधिवत हिस्सा देने के लिए पर्याप्त रक्षोपाय लेखबद्ध होंगे।
पूर्ण उपयोग निवारित सभी नागरिकों द्वारा नागरिक अधिकारों के उपभोग की गारंटी कानून द्वारा दंडनीय अपराध के रूप में करने के लिए परिकलित लोप के किसी कृत्य को अपराध बनाते हुए दी जाएगी।
केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकारां में मंत्रिमंडल के गठन में जहां तक संभव
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