खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 215

की माँग की। अछूतों का दावा सबने स्वीकार किया। यह न्यायोचित और तर्कसंगत था। उन्होंने दावा किया कि हिंदुओं और मुसलमानों, हिंदुओं और सिक्खों, हिंदुओं और ईसाइयों के बीच दरार उस दरार की तुलना में कुछ भी नहीं, जो हिंदूओं और अछूतों के बीच है। यह अत्यंत व्यापक और अत्यधिक गहरी है। हिंदुओं और मुसल­ मानों के बीच दरार धार्मिक है, सामाजिक नहीं। हिंदुओं और अछूतों के बीच दरार धार्मिक भी है और सामाजिक भी। हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच विद्यमान दरार से उपजी प्रतिद्वन्द्विता मुसलमानों के लिए राजनीतिक आपदा नहीं कही जा सकती क्योंकि हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच का संबंध मालिक और दास का संबंध नहीं है। यह तो सिर्फ एक मनमुटाव है। दूसरी तरफ हिंदुओं और अछूतों के बीच दरार को अछूतों के लिए राजनीतिक आपदा कहा जाना चाहिए क्योंकि दोनों के बीच स्वामी और दास का संबंध है। अछूतों ने दावा किया कि सामाजिक प्रक्रियाओं के माध्यम से उनके और हिन्दुओं के बीच खाई को पाटने के प्रयास सदियों से किए जाते रहे हैं। वे सब प्रयास नाकाम रहे हैं। उनकी सफलता की कोई आशा नहीं है। सत्ता हिन्दुओं के हाथों में हस्तांतरित की जा रही है इसलिए यदि बेहतर नहीं तो उसी स्तर के सुरक्षा उपाय अछूतों के लिए भी किए जाने चाहिएँ जैसे कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से संबंधित लोगों के लिए किए जा रहे हैं।

यहाँ श्री गांधी के पास अछूतों की माँग का समर्थन करके तथा हिन्दुओं के अत्याचार और उत्पीड़न के प्रतिरोध की उनकी शक्ति को मजबूत करके अछूतों के प्रति सहानुभूति प्रकट करने का मौका था। अपनी सहानुभूति दिखाने के बजाय श्री गांधी ने उनको पराजित करने के लिए अपनी शक्ति का पूरा इस्तेमाल किया। उन्होंने अछूतों को अलग-थलग करने के लिए मुसलमानों के साथ समझौता किया। मुसलमानों को अपने पक्ष में करने में नाकाम होकर वे अछूतों को वैसे ही राजनीतिक अधिकार (जैसे कि मुसलमानों और अन्य समुदायों को दिए गए थे) देने के निर्णय को वापस लेने पर ब्रिटेन सरकार को बाध्य करने के लिए आमरण भूख हड़ताल पर चले गए। जब भूख-हड़ताल नाकाम हो गई और श्री गांधी पूना समझौते पर हस्ताक्षर करने पर विवश हुए जिसमें अछूतों की राजनीतिक माँगें मान ली गईं तो उन्होंने इसका बदला उनके राजनीतिक अधिकारों को व्यर्थ करने के लिए काँग्रेस को चुनाव के अनुचित तरीके अपनाने की छूट देकर लिया।”

  1. लेख और भाषण, खंड - 9 पृष्ठ 246-249।