1. मैं चरित्र वाला व्यक्ति हूँ। - Page 221

204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसमें कोई संदेह नहीं कि डॉ. अम्बेडकर उस धन राशि को वापस करने के लिये वचनबद्ध थे, जो बड़ौदा राज्य ने विदेश में अध्ययन करवाने हेतु उन पर खर्च की थी, लेकिन जैसी उनकी वर्तमान स्थिति थी, उसमें उनके पास अपने जीवनयापन के लिए भी पर्याप्त धन नहीं था तो अपने ऋण की वापसी कहाँ से करते। इन परिस्थितियों में उन्होंने बड़ौदा राज्य द्वारा उन पर खर्च की गई धनराशि लौटाने में अपनी असमर्थता व्यक्त की, हालांकि उन्होंने इसे लौटाने की अपनी इच्छा प्रकट की। इन्होंने बड़ौदा राज्य के सरकारी अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक निवेदन किया कि उन्हें तब तक का समय दें, जब तक कि वे यह धन राशि लौटाने की स्थिति में न आ जायें।

छात्रवृत्ति की धन राशि वापस हासिल करने हेतु मुकदमा दायर करने के बड़ौदा राज्य सरकार के कदम पर श्री पंडित को डॉ. अम्बेडकर का पत्र। उनके अपने अद्भुत तरीके तथा शैली से लिखा गया यह पत्र काफी रोचक है। यही पत्र यहाँ अक्षरशः दिया जा रहा हैः

निजी

बी.आर. अम्बेडकर दामोदर हॉल,

परेल, बम्बई

9-12-1924

प्रिय श्री पंडित,

इसी माह की छः तारीख के आपके पत्र के लिये बहुत शुक्रिया। मैंने इसकी विषय-वस्तु को काफी ध्यान से नोट कर लिया है। यदि आपने बड़ौदा सरकार के साथ हुआ मेरा पूर्व पत्र-व्यवहार देखा होता, तो आपको राज्य के प्रति मेरा यह दायित्व याद दिलाने की कुछ खास आवश्यकता महसूस न होती। चूँकि, मैंने उन्हें कई बार लिखा है कि मेरे और बड़ौदा राज्य के बीच कानूनी संबंध चाहे जो भी हों, मैं राज्य को अपने ऊपर किया गया खर्च लौटाने के लिये बाध्य हूँ। और मेरा विश्वास कीजिये, यदि मेरे पास पैसा होता तो मैं एक क्षण की भी देरी किये बिना इस दायित्व से स्वयं को मुक्त कर लेता। मैं स्वयं को वह कहने के लिये मुक्त महसूस करना चाहता हूँ जो मैं बड़ौदा सरकार द्वारा अपने साथ किये गये व्यवहार के विषय में मैं कहना चाहता हॅूं और जिससे आप पूरी तरह से अनभिज्ञ लगते हैं। लेकिन इस समय मेरी जो स्थिति है, उसमें मेरे पास अपनी आजीविका चलाने के