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लिये भी पर्याप्त धन नहीं है, इसलिये मैं यह ऋण चुकाने के लिये बिल्कुल भी नहीं बचा पाता। आप कहते हैं कि मैं अब बम्बई में “स्थापित” हूँ और आपको मेरे अपने दायित्वों को पूरा करने में कोई कठिनाई नज़र नहीं आती। मेरे लिये यह समझना थोड़ा मुश्किल है कि “स्थापित” से आपका क्या तात्पर्य है। अगर आपको लगता है कि मैं ढेरों रुपये कमा रहा हूँ, तो मुझे अफसोस है कि आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं। लगता है, कि आप भूल गए हैं कि मैं केवल एक बैरिस्टर हूँ, जो काम पाने के लिये संघर्षरत है। सबसे पहले तो यह तथ्य है कि मुझे इस प्रैक्टिस में केवल एक ही वर्ष हुआ है। दूसरे, इस व्यवसाय में जाति-भेद व्यापक रूप से मौजूद है, जिसका सामना मुझे आगे बढ़ते हुए हर क़दम के साथ करना पड़ता है। मेरे लिये यह संघर्ष सबसे अधिक कड़वा है और इसलिये मुझे अपने स्तर तथा योग्यता से काफी नीचे की चीज़ें लेनी पड़ती हैं। वर्तमान परिस्थितियों के तहत मैं राज्य द्वारा स्वयं पर खर्च की गई धन-राशि लौटाने में अभी असमर्थ हूँ, यद्यपि मैं लौटाने का इच्छुक हूँ। यदि बड़ौदा सरकार पैसे लौटाने में मेरी असमर्थता को मेरी अनिच्छा समझती है, तो उनके पास रास्ता है- अदालत जायें, डिक्री प्राप्त करें और इसे निष्पादित करें, अगर उन्हें लगता है कि यह वास्तव में उनके लिये फायदेमंद होगा। यह सच है कि यदि मामला अदालत में गया, तो समुदाय के नाम पर धब्बा लगेगा। दूसरी तरफ़, मुझे लगता है कि यदि मुकदमे के दौरान समुदाय को यह मालूम होता है कि बड़ौदा सरकार के प्रति मेरा क्या व्यवहार रहा है, तो मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसी कोई बात नहीं होगी, जिसमें समुदाय को मेरी वजह से शर्मिन्दगी उठानी पड़े। दूसरी ओर, मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इस मुकदमे के चलने के साथ-साथ जो कीचड़ उछलेगा उसके कुछ छींटे महामहिम महाराजा और बड़ौदा राज्य पर भी गिरेंगे, जिसके लिये दोनों को शर्मिन्दगी उठानी पड़ेगी।
बेशक, इस स्थिति से बचना बेहतर होगा। लेकिन इससे बचने का एकमात्र उपाय यह है कि बड़ौदा सरकार मुझे तब तक का समय दे जब तक मैं इस राशि का भुगतान करने की स्थिति में आता हूँ। लगता है बड़ौदा सरकार मुझे ठीक से नहीं जानती। मैंने उन्हें एक बार दिखाया है कि मैं एक चरित्रवान व्यक्ति हूँं। यदि मैं पर्याप्त चरित्रवान न होता तो मैं बड़ौदा कभी लौटता ही नहीं। मेरे पास ब्रिटिश सेवाओं में प्रवेश के कई ऑफर थे। इन ऑफरों को एक चरित्रवान व्यक्ति के अलावा और कौन ठुकरा सकता है? वे मुझे केवल एक स्वतंत्र अध्येता के रूप में जानते हैं। लेकिन वे भूल गये हैं कि स्वतंत्र केवल एक चरित्रवान व्यक्ति ही हो सकता है।
जो भी हो मुझे उम्मीद है कि आप समझ गये होंगे कि मैं राज्य के प्रति अपने दायित्व पूरे करने के लिये बहुत उत्सुक हूँ और यदि मैं तुरंत ऐसा नहीं कर पा रहा