27. वतनदार महारों, मेंगों आदि की शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन। - Page 338

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कर दिया जाता है और उन्हें गांव में घुसने नहीं दिया जाता। ऐसे मामलों

में, वतनदारों के लिए आवश्यक जानकारी विशेषकर गांव में जन्म और

मृत्यु की जानकारी हासिल करना असंभव हो जाता है और परिणामस्वरूप

वतनदारों को, बिना किसी गलती के, जुर्माने से दंडित किया जाता है।

  1. उक्त संकल्प की ड्यूटी सं. 15 के अनुसार, वतनदारों से अपेक्षित है कि वे

लावारिस शवों को हटायें। मेरी राय में, यह काम पुलिस द्वारा किया जाना

चाहिए। अतः वतनदारों को यह सेवा करने से छूट दी जानी चाहिए।

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  1. अंत में, मेरा विनम्र निवेदन है कि इस ज्ञापन में अंकित शिकायतों का

समाधान अनिवार्य है। मुझे महारों से अब तक वसूल की गई जूड़ी के बारे

में पूरी जानकारी नहीं है। नासिक जिले के आंकड़ों से जो मुझे दिए गए

हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि अकेले नासिक जिले में नई नीति के अधीन

अब तक महार की जमीनों पर वसूल की गई जूड़ी की राशि प्रतिवर्ष 2,201

रु. 4 आने 11 पैसे है। इसके कारण भारी तनाव उत्पन्न हो गया है और

मुझे डर है कि यदि इन शिकायतों को दूर नहीं किया गया तो वतनदार

महार हरेगांव सम्मेलन में पारित पिछले संकल्प के अनुसार हड़ताल पर

जा सकते हैं। मैंने उन्हें इस आशा में हड़ताल टालने के लिए कहा था

कि सरकार अपनी नीति बदलेगी और उनके साथ न्याय करेगी। लेकिन

अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है। इसलिए मैं महामहिम से विनम्र

अनुरोध करता हूं कि इस सवाल को तात्कालिक मानकर उस गलती को

सुधारें जो सरकार द्वारा चलाई गई नीति के अनुसार इन वतनदारों के

साथ की गई है। यदि इस नीति से प्रभावित महार वतनदार हड़ताल पर

चले गए अथवा अपनी संपत्ति की कुर्की से जूड़ी वसूली के विषय में संघर्ष

पर उतरे, जैसाकि मुझे कुछ स्थानों पर संघर्ष शुरू होने की खबर मिली

है, इसका उत्तरदायित्व अकेले सरकार पर होगा, क्योंकि महार वतनदारों

के पास यह कहने का आधार होगा कि वे सांविधानिक साधनों से अपने

शिकायतें दूर करवाने की कोशिश कर चुके हैं और नाकाम रहे हैं।

  1. मैं, सादरपूर्वक, आग्रह करूंगा कि निम्न ग्राम सेवकों के बारे में सरकार

द्वारा अपनाई गई नीति निलंबित की जानी चाहिए। इसमें उठने वाले मुद्दे

बहुत बड़े हैं और उन पर मतभेद हैं। वे मुद्दे महामहिम के सलाहकारों

की, चाहे वे कितने भी सक्षम हों, कार्यपालक कार्रवाई से तय नहीं किए