27. वतनदार महारों, मेंगों आदि की शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन। - Page 337

320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के साथ संलग्न है, सरकार द्वारा विहित कार्यों के प्रति निम्न ग्राम सेवकों

की आपत्तियों का उल्लेख है।

  1. इन वतनदारों की दलील है कि दैनिक मजदूरी के रूप में अतिरिक्त

पारिश्रमिक के बिना, मद सं. 1, 3, 5, 9, 13 और 19 पर सूचीबद्ध कार्य

करने के लिए न कहा जाए। जब कभी उनसे ये कार्य करने की अपेक्षा

की जाए तो उन्हें कम से कम 6 आने दिए जाएं। इसमें, मुझे विश्वास

है, वे न्याय की बात करते हैं। मुझे इस प्रांत के वतनदारों से अनेक

शिकायतें मिली हैं कि गांव और ताल्लुका अधिकारी उनसे अपेक्षा करते हैं

कि वे उनकी निजी सेवा करें जैसे प्राईवेट चिट दूर गांव तक ले जाना।

इसका बहाना यह है कि ऐसी सेवा भी ऊपर वर्णित किसी न किसी मद

के अंतर्गत आती है। इस संबंध में मेरा यह भी विनम्र निवेदन है कि प्रायः

सभी सरकारी अधिकारियों को, मुख्यालय से बाहर जाने पर, यात्रा और

निर्वाह भत्ता दिया जाता है। अतः यह न्यायसंगत होगा कि जब कभी इन

वतनदारों से अपने गांव के बाहर जाने के लिए कहा जाए, उन्हें उसमें

होने वाले अतिरिक्त खर्च की पूर्ति करने के लिए उचित भत्ता भी दिया

जाना चाहिए।

  1. उल्लिखित सरकारी संकल्प में वर्णित ड्यूटी सं. 2 के बारे में इन वतनदा­

रों का कहना है कि वह ड्यूटी खातेदारों को ’’बटकी’’ और ’’दावंडी’’

नाम से पुकारने तक सीमित रहनी चाहिए और इसका विस्तार अक्खड़

खातेदारों के पीछे बार-बार दौड़ने के लिए नहीं होना चाहिए। इस संबंध

में, मैं महामहिम महोदय की जानकारी में यह बात लाना चाहता हूं कि

अनेक उदाहरण ऐसे हैं जब वतनदारों को अक्खड़ खातेदारों द्वारा हमला

किए जाने और उन्हें फंसाये जाने की जोखिम उठानी पड़ती है। इन सब

आकस्मिकताओं से बचने का एक ही उपाय है जैसाकि ऊपर प्रस्तावित

किया गया है।

  1. उल्लिखित सरकारी संकल्प में वर्णित ड्यूटी सं. 7 के संबंध में वे छूट

चाहते हैं। इस ड्यूटी के अधीन वतनदार गांव में जन्म और मृत्यु संबंधी

जानकारी ग्राम अधिकारियों को देने के लिए बाध्य हैं। निम्नलिखित कारण्

ां से, इन वतनदारों को इस काम से छूट दी जानी चाहिए और संबंधित

व्यक्तियों को गांव में जन्म और मृत्यु की सूचना ग्राम पाटिल को देने के

लिए बाध्य किया जाना चाहिए जैसाकि सभी नगरपालिका क्षेत्रों में किया

जाता है। कभी-कभी तथाकथित सवर्ण ग्रामीणों द्वारा वतनदारों का बहिष्कार