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दलित वर्गों को वायसराय की परिषद से बाहर रखना घोर अपमान
और विश्वासघात है
ख्1,
बम्बई, गुरुवार *
’’दलित वर्गों के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने श्री एल. एस. अमेरी, भारत के विदेश मंत्री को संबोधित एक तार में कहा है - ’’दलित वर्ग स्वयं को वायसराय की पुनर्गठित परिषद से बाहर रखे जाने को घोर अपमान और विश्वासघात मानते हैं।’’
तार में आगे लिखा है - ’’आपके द्वारा 6 करोड़ दलित लोगों का निरादर करना और मुसलमानों को जो हिन्दुओं के लगभग बराबर हैं, 43 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देना विस्मयकारी है। ऐसा लगता है सरकार केवल कुछ समुदायों के पास बंधक रखी हुई है।
दलित वर्गों को भारतीय राष्ट्रीय जीवन में एक महत्वपूर्ण सुभिन्न घटक के रूप में निष्ठापूर्वक मानने के बाद, इस बात का आग्रह करने के बाद कि संविधानिक परिवर्तनों में उनकी सम्मति अनिवार्य है, युद्ध में उनके सहयोग का शोषण करने के बाद उन्हें परिषद् से बाहर रखना आपके असद्भाव को दर्शाता है।
दलित वर्गों के हित और नाम में, विरोध प्रकट करते हुए, मैंने व्यक्तिगत रूप से अंग्रेजों से कभी भी सहायता नहीं मांगी, उस पर कभी निर्भर नहीं किया अथवा कभी भी सहायता नहीं ली। मैं भविष्य में उनके बिना काम कर सकता हूं। आप अपनी मर्जी से चुनाव कर सकते हैं।
मैं दलित वर्गों के लिए न्याय चाहता हूं। मैं आपको चेतावनी देता हूं कि दलित वर्ग परिषद् में प्रतिनिधित्व के अपने अधिकार को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। मेरा आपसे प्रबल आग्रह है कि उसे मान्यता दी जाए। परिषद् में एक सदस्य बढ़ाने से कोई परेशानी नहीं होगी।’’
- ’ * द फ्री प्रेस जर्नल, तारीख 1 अगस्त, 1941।31 जुलाई, 1941।