31. डॉ अम्बेडकर और यहूदी लोग। - Page 353

336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन्हें कानून दिए तथा डेरा बनाने के अनुदेश दिए।’’

’’मोसेस ने अनुयायियों के हाथों क्या कष्ट नहीं भोगा’’? जब इजराइल के बालकों ने मिस्र छोड़ा और फराओं की सेना ने पीछाकर उन पर आक्रमण किया तो वे दुखी हुए और उन्होंने मोसेस से कहा- चूंकि मिस्र में कब्र नहीं हैं, इसलिए क्या आप हमें मरने के लिए दूर ले जा रहे हैं ’? जंगलों में मरने से तो बेहतर था मिस्रवासियों की सेवा करना।’’

’’इजराइली चलते-चलते एलिम पहुंचे और वहां पहुंचकर उन्होंने अपना डेरा डाला। वहां उन सबके लिए पर्याप्त पानी नहीं था। वे सब चिल्लाने लगे, हमें पानी दो, आप हमें मिस्र से बाहर किस लिए लाए हो, क्या हमें और हमारे बच्चों तथा हमारे जानवरों को प्यासे मारने के लिए यहां लाए हो ? वे उन पर पत्थर मारने के लिए तैयार थे क्योंकि वहां पानी नहीं था।’’

’’मोसेस माउंट सिनई पर गए और वहीं पर ठहर गए। यहूदी तुरंत आरों के पास गए और उनसे बोले, ’हमारे लिए ऐसा देवता बनाओ जो हमारे सामने आएं, क्योंकि इस मोसेस के लिए जो हमें मिस्र देश से बाहर लाया है,’ हमें इस बात का कोई दुख नहीं है कि उसका क्या हो गया है।’’

उनके नेतृत्व को भी चुनौती दी गई। ओल्ड टैस्टामेंट में लेखबद्ध है कि मरियम और आरों मोसेस के खिलाफ बोले थे, क्योंकि उन्होंने यूथोपियाई स्त्री से विवाह कर लिया था। उन्होंने कहा था - ’’क्या ईश्वर केवल मोसेस के माध्यम से बोलते हैं ? क्या वह हमारे माध्यम से भी नहीं बोलते ?’’ फिर भी मोसेस ने उनकी निन्दा, उनकी गालियां, झेलीं, उनकी अधीरता को सहन किया और पूरे दिल से उनकी सेवा की।

’’जैसाकि ओल्ड टैस्टामेंट में सच कहा गया है, इजराइल में मोसेस जैसा कोई पैगम्बर नहीं हुआ जिन्हें ईश्वर से साक्षात्कार हुआ हो।’ मोसेस यहूदियों के महान नेता ही नहीं थे बल्कि वे ऐसे नेता थे जिनके जन्म के लिए कोई भी दलित समुदाय प्रार्थना करेगा।’’

’’निष्क्रमणों की कहानी में और मोसेस के नेतृत्व में दूसरों की कितनी भी रुचि रही हो मेरे लिए वे नित्य प्रेरणा और आशा के स्रोत रहे हैं।’’

’’मुझे विश्वास है, जिस प्रकार यहूदियों के लिए आशा की जमीन थी उसी प्रकार दलित वर्गों की नियति में भी आशा की जमीन होगी। मुझे भरोसा है कि जिस प्रकार