31. डॉ अम्बेडकर और यहूदी लोग। - Page 354

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यहूदी अपनी आशा की जमीन पर पहुंचे थे उसी प्रकार अंत में दलित वर्ग भी अपनी आशा भूमि पर पहुंच जाएंगे।’’

’’मैं आज भारत में दलित वर्गों की वही हालत देखता हूं जो यहूदियों की मिस्र में दासता के दौरान थी। मोसेस के रूप में मुझे एक ऐसा नेता दिखाई पड़ता है, जिसे अपने लोगों के प्रति असीम स्नेह ने कठिनाइयों का सामना करने और तिरस्कार झेलने का अदम्य साहस प्रदान किया है।’’

’’मैं यह स्वीकार करता हूं कि यदि मुझे दलित वर्गों के उद्धार के प्रयास में कोई चीज प्रेरणा देती है तो वह मोसेस की कहानी है। मोसेस ने यहूदियों को दासता से मुक्त कराने का कृतघ्न, किन्तु महान कार्य, किया था।’’

स्वाभाविक ही है, यहूदी लोगों ने डॉ. अम्बेडकर और उनके जीवन कर्म की हमेशा भूरिभूरि प्रशंसा की है। समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए उनका संघर्ष उन लोगों के दिलों पर छाया है जिन्हें अपनी आशा के देश अर्थात् इजराइल से निष्कासन से सैकड़ों वर्षों तक इस कारण भेदभाव और अत्याचार का कष्ट भोगना पड़ा था क्योंकि वे अपने यहां बहुसंख्यक लोगों से भिन्न थे।

हम इजराइल वासी आज तक इजराइल को पुनः राष्ट्रीय स्वदेश बनाने के संघर्ष में डॉ. अम्बेडकर के समर्थन के लिए गर्व करते हैं।

(सौजन्य : इजराइल से समाचार)’’ ख्1,

  1. प्रजा बंधु, तारीख 30 दिसम्बर, 1991।