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डॉ. अम्बेडकर का तर्क
कोई भी चीज जो मतदाताओं की मानसिकता पर भ्रामक प्रभाव डालती है वह अनुचित प्रभाव और हस्तक्षेप होता है। यदि कोई प्रत्याशी मतदाताओं को डराने के लिए प्रचार करता है तो वह हस्तक्षेप करता है और स्पष्ट रूप से मतदाताओं की मानसिकता को भ्रमित करता है। यदि वह मतदाताओं से नियम के किसी महत्त्वपूर्ण बिन्दु को छिपाता है तो वह मतदाताओं के साथ धोखा करता है और उन पर अनुचित प्रभाव डालता है। मतदाताओं को निर्वाचन नियम के विरुद्ध कार्य करने के लिए कहना भ्रष्ट आचरण है।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियम के कुछ बिन्दू श्री एन.जे. वाडिया, अध्यक्ष श्री एम.के. लालकाका और श्री जी.पी. महेश्वर का सदस्यता वाले चुनाव ट्रिब्यूनल में अपनी और समाजवादी नेता श्री अशोक मेहता की याचिका जिसमें उन्होंने बम्बई शहर के उत्तरी निर्वाचन-क्षेत्र के पिछले आम चुनाव में अनाचार की शिकायत की थी, कि दोबारा शुरू हुई सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए थे।
डॉ. अम्बेडकर, जो व्यक्तिगत् रूप से उपस्थित हुए थे, ने चुनावों में एजेंसी के प्रश्न पर काफी लम्बी बहस की और कुछ प्रत्याशियों द्वारा समाचार-पत्रों एवं पर्चों द्वारा किये गये प्रचार का उल्लेख किया और वह सिद्ध करना चाहते थे कि इन प्रकाशनों से जन-अधिनियम के प्रतिनिधित्व की धारा 123(2) के विशिष्ट संदर्भ में अनुचित प्रभाव पड़ा है।
अनुचित हस्तक्षेप
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उन्होंने अंग्रेजी एवं भारतीय कानून के मध्य अंतर को इंगित किया और कहा कि अंग्रेजी कानून में अनुचित हस्तक्षेप का स्पष्ट रूप से उल्लेख है जब कि भारतीय कानून में इन शब्दों का प्रयोग सामान्य अर्थ में किया गया है।
उन्होंने श्री एस.ए. डांगे, कम्युनिस्ट प्रत्याशी और डॉ. जी.बी. देशमुख, स्वतंत्र प्रत्याशी द्वारा और उनकी ओर से प्रकाशित बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि मतदाताओं को एक ही प्रत्याशी के पक्ष में अपने दोनों मत डालने के लिए कहकर उन्होंने उन पर अनुचित प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि पूर्व में चार गवाहों से पूछताछ करने पर एक ने स्वीकार किया कि श्री डांगे जानते थे कि वामपंथी, जिन्होंने