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मुझे तर्कसंगत अध्ययन-गोष्ठी/सेमिनार आयोजित करने का आपका विचार पसंद आया जिसमें भिक्खुओं और गैर-भिक्खुओं को बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों की शिक्षा दी जा सके और उन्हें विभिन्न भाषाएं सिखाई जाएं ताकि उन्हें विभिन्न भागों में भेजा जा सके।
जहाँ तक भारतीय युवाओं की मानसिकता के सम्बंध में मेरा विचार है, उनको मठवासीय जीवन के आदर्श सीखने के लिए प्रेरित करना बहुत कठिन है। इसके लिए उत्तम उपाय यह है कि हम जापानी विवाहित पुरोहितों की तरह एक वर्ग सृजित कर सकते हैं जैसा प्रोटेस्टेन्ट ईसाईयों ने किया है। इसके लिए हमें उनके शैक्षणिक काल में ही सहायता के लिए साधन जुटाने होंगे और इसके पश्चात् वे अपना सार्वजनिक जीवन पुरोहित के रूप में यापन करेंगे।
बम्बई में धर्म परिवर्तन अनुष्ठान सम्भवतः दिसम्बर में होगा, इसके क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान होने की अधिक सम्भावना है ताकि अनेक लोगों के पास यात्रा की सुविधा हो जो कि उनको इस अवधि के अलावा नहीं मिल सकती। मैं अपने बम्बई के लोगों से परामर्श करने के पश्चात् आपको वास्तविक तिथि बताऊँगा।
मुझे आशा है कि आप महा बोधि पत्रिका में नागपुर अनुष्ठान का अच्छा प्रचार कर रहे होंगे। मैं चाहूँगा कि आप निम्नलिखित बिन्दुओं का विशेष रूप से उल्लेख करें :-
- कि प्रथम दिन लगभग तीन लाख और अस्सी हज़ार लोगों ने अपना धर्म
परिवर्तन कर बौद्ध धर्म धारण किया। अनुष्ठान के पहले दिन के पश्चात्
काफी संख्या में लोग पहुँचे क्योंकि अगले दिन कार्यक्रम के प्रारम्भ में ही
दूसरा अनुष्ठान किया जाना था।
- कि 16 अक्तूबर, 1956 को चन्दा में एक और सम्मेलन का आयोजन शाम
के समय किया गया। इसमे भी एक और धर्म परिवर्तन अनुष्ठान किया
गया और लगभग तीन लाख लोगों का धर्म परिवर्तन किया गया।
- कल के समाचार-पत्र में छपे समाचार के अनुसार मेरे वहाँ से चले आने
के पश्चात् अकोला में पुनः धर्म परिवर्तन अनुष्ठान हुआ और दो हज़ार से
अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन किया गया।
- कि एक मराठी समाचार-पत्र ‘नवयुग’ ने नागपुर में धर्म परिवर्तन अनुष्ठान
में उपस्थित भीड़ की बेहतरीन तस्वीरें छापी।
- कि मुझे धर्म परिवर्तन के लिए सभी दिशाओं से पत्र प्राप्त हो रहे हैं।