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परिशिष्ट -
धर्मान्तरण पर दिनांक 19.6.1936 को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के बयान
श्री राजा को डॉ. मुज्जे का पत्र
डॉ. मुज्जे ने राव बहादुर एम.सी. राजा को निम्नलिखित पत्र नई दिल्ली दिनांक 30 जून, 1936 को लिखा -
प्रिय श्रीमान्
बम्बई के मित्रों तथा श्रीमन् सेठ जुगल किशोर बिरला द्वारा तत्काल बुलाने पर डॉ. अम्बेडकर की सहमति से मुझ इस मास की 18 तारीख को बम्बई जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। वहाँ डॉ. अम्बेडकर के साथ मेरे तीन दिन तक लम्बे वार्तालाप होते रहे। अन्ततः हिन्दूवाद के विरुद्ध उनके आन्दोलन के सौहार्दपूर्ण निपटान के लिए एक प्रारूप तैयार किया गया। डॉ. अम्बेडकर इससे पूर्णतया सहमत थे।
यह सूत्र इस प्रकार से है :
यदि डॉ. अम्बेडकर को अपने निर्णय की घोषणा करनी पड़े कि वे और उनके अनुयायी इस्लाम और ईसाई धर्म की तुलना में सिख धर्म को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और वह ईमानदारी व निष्ठा से हिन्दुओं और सिखों के साथ उनकी संस्कृति के प्रचार के लिए सहयोग करेंगे और दलित वर्गों को मुसलमान बनाने के मुस्लिम आन्दोलन का प्रतिरोध करेंगे तो हिन्दू महासभा को भी हिन्दू संस्कृति में रहने की उनकी सहमति को दृष्टिगत् रखते हुए यह घोषणा करने के लिए तैयार किया जाएगा कि वे नीचे दिए गए बिंदुओं पर आपत्ति नहीं करेंगे-
(1) दलित वर्गों के सिख धर्म में धर्मान्तरण पर;
(2) धर्मान्तरित सिखों को अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित करने पर, और
(3) पूना समझौता में दिये गये प्रावधान के अनुसार गैर-सिख और दलित