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बताया। इस तथ्य से कि डॉ. अम्बेडकर का जोरदार स्वागत किया जाना और हाल ही में मद्रास में ही हजारों लोगों द्वारा अलग प्रतिनिधित्व के लिए उनकी मांग का समर्थन किया जाना ही इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण है कि राव बहादुर राजा को अपनी स्वयं की प्रेजीडेन्सी में भी अधिक समर्थन प्राप्त नहीं है। मताधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत किये गये प्रमाण भी निर्विवाद यह सिद्ध करते हैं कि दलित वर्ग का बहुमत भी अलग निर्वाचन-क्षेत्र के पक्ष में है।
बम्बई कांग्रेस एवं महासभा की शाखाओं ने कहा है कि श्री बी.जी. देवरूखकर ने मताधिकार समिति को मुज्जे - राजा समझौते के समर्थन में दलित वर्गों से संबंघित पाँच हजार से अधिक लोगों द्वारा हस्ताक्षारित ज्ञापन भेजा है। तथापि यह पाया गया है कि यह कुछ भी नहीं बल्कि एक कल्पना मात्र है। सच यह है कि मताधिकार समिति द्वारा जारी प्रश्नावली के कुछ उत्तरों को कुछ महत्त्वहीन नगण्य निकायों, जिनके सदस्यों की संख्या नगण्य है, के नाम से प्रेषित कर दिया गया है। श्री देवरूखकर केवल अपनी ओर से निवेदन कर रहे हैं और चमार समुदाय की उपजाति अर्थात् डाभोली चमार के कुछ लोग हैं जो महाराष्ट्र में कथित अस्पृश्नियों का छोटा सा अंश है, उनके साथ हैं।
हम कांग्रेस एवं महासभा के लोगों और दलित वर्गों में उनके मित्रों को चुनौती देते हैं कि सार्वजनिक सभा, जो विशेषकर इस उद्देश्य के लिए होती है, में अपना बहुमत साबित करें। जब तक वह ऐसा करने के लिए तैयार न हो तो कांग्रेस एवं महासभा की शाखाओं के दावों की अवहेलना की जाए जिसके वे पात्र हैं।
दिवाकर पगारे (महार)
के.जी. चन्दोरकर (चमार)1
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- राव बहादुर एमसी राजा - दलित वर्ग के एक नेता, मद्रास निवासी अखिल भारतीय दलित वर्ग
संघ के अध्यक्ष। मद्रास विधनप्रिषद के सदस्य, सेंट्रल एसेम्बली के सदस्य।