खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 66

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वे सफल हो जाते तो यह विचार करना आवश्यक होता कि क्या वह रूढि़ अनुचित अथवा सार्वजनिक नीति के विपरीत है (यद्यपि सख्ती से कहें तो इस पर निचले न्यायालयों में जिरह नहीं की गयी थी)। नगरपालिका में चौदार तालाब निहित करने के कानूनी प्रभाव पर विचार किया जाना निश्चित रूप से आवश्यक हुआ होगा, और यह प्रश्न कि क्या किसी मामले में अपीलकर्ताओं को इस मुकदमे में जिसमें कानूनी स्वामी कोई पक्ष नहीं है, कोई राहत प्रदान की जा सकती है या नहीं। परंतु चूंकि जिस दृष्टि से हम यह मामला आगे बढ़ाते हैं, इन प्रश्नों पर निर्णय लेना आवश्यक नहीं है और चूंकि उन पर बहुत पूर्णतः अथवा प्रभावी रूप से बहस नहीं की गई है, इसलिए हम कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहते।

अपील खर्चे सहित खारिज की गई।

बंबई उच्च न्यायालय के आदेश द्वारा

न्यायालय की मुहर ह./-

आर. एस. बावडेकर

रजिस्ट्रार

ह./-

उच्च न्यायालय अपील अधिकारिता कृते उप-रजिस्ट्रार प्रमाणित प्रतिलिपि 28 जून, 1960 ख्1, बंबई

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के इन शब्दों को कि ‘‘मांगने से, और हड़पने वालों के अन्तःकरण से अपीलों द्वारा खोए हुए अधिकार कभी भी पुनः प्राप्त नहीं होते बल्कि अनथक संघर्ष से प्राप्त होते हैं’’ महाद सत्याग्रह द्वारा सिद्ध किया गया है - संपादक।

  1. खैरमोर; खंड 3, पृष्ठ 258-263 ।