1. मेरी कोई मातृभूमि नहीं है - Page 69

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक विशिष्ट तरीके से, जिसका गाँधी, गैर मुसलमानों और गैर-यूरोपीय नेताओं और प्रतिनिधियों से बातचीत करने में अनुपालन करते थे। पहले तो कुछ देर उन्होंने डॉ. अम्बेडकर को नहीं देखा और सुश्री स्लेड तथा अन्य लोगों के साथ बातचीत करते रहे। डॉ. अम्बेडकर के लोगों को अब यह भय लगने लगा था कि गाँधी की ओर से और थोड़ी सी उदासीनता से संघर्ष की स्थिति जाएगी। तभी गाँधी, अम्बेडकर की ओर मुड़े, जिन्हें उन्होंने पहली बार देखा था और वे औपचारिक प्रश्न के बाद मुख्य विषय पर आए।

गाँधी - अच्छा कहिए डॉक्टर आपको इस विषय में क्या कहना है?

अम्बेडकर : आपने मुझे आपके विचार सुनाने के लिए बुलाया है। कृपया मुझे बताएं कि आपको क्या कहना है। अथवा आप कृपया मुझसे कुछ प्रश्न पूछ सकते हैं और मैं उत्तर दूंगा।

गाँधी! : (अम्बेडकर की ओर एकटक देखते हुए)ः मैं समझता हूँ, आपकी मुझसे और कांग्रेस से कुछ शिकायतें हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि मैं अपने स्कूल के दिनों से ही जब आप पैदा भी नहीं हुए थे, तब से अछूतों की समस्या पर सोचता रहा हूँ। आप संभवतः जानते होंगे, मैंने इस समस्या को कांग्रेस के कार्यक्रम में सम्मिलित करने और इसे कांग्रेस के मंच का एक घोषणापत्र बनाने का बहुत प्रयास किया था। कांग्रेस के नेताओं ने इस तर्क पर इसका विरोध किया कि यह एक धार्मिक और सामाजिक प्रश्न है और इसीलिए इसे राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। कांग्रेस ने अछूतों के उत्थान पर बीस लाख रुपए से अधिक व्यय किया है और यह वास्तव में आश्चर्यजनक है कि आप जैसे लोग मेरा और कांग्रेस का विरोध करें। अगर आपको अपनी बात के औचित्य में कुछ कहना है तो आप ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।

अम्बेडकर : यह सही है, महात्माजी, आपने मेरे जन्म से पूर्व अछूतों की समस्या के बारे में सोचना प्रारंभ किया था। सभी वृद्ध और वयस्क व्यक्ति सदैव आयु के मसले पर बल देना चाहते हैं। यह भी सत्य है कि आपके कारण कांग्रेस पार्टी ने इस समस्या को मान्यता दी। परंतु मुझे स्पष्ट रूप से आपसे कहना है कि कांग्रेस ने इस समस्या को औपचारिक मान्यता देने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया। आप कहते हैं कि कांग्रेस ने अछूतों के उत्थान के लिए बीस लाख रुपए से अधिक व्यय किया है। मैं कहता हूं यह पूरी बर्बादी थी। ऐसी सहायता से मैंने अपने लोगों के दृष्टिकोण और आर्थिक दशा में विस्मयकारी परिवर्तन कर दिया होता। इस दशा में आपका मुझसे बहुत पहले मिलना अनिवार्य होता। परंतु मुझे आपसे कहना है कि कांग्रेस अपने विचार के प्रति गंभीर नहीं है। अगर यह गंभीर होती तो उसने कांग्रेस