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का सदस्य बनने के लिए खद्दर पहनने जैसी शर्त के समान छूआछूत की शर्त अवश्य हटाई होती। किसी भी व्यक्ति, को जो अछूत महिला या पुरुष को अपने घर में रोजगार नही देता अथवा अछूत विद्यार्थी का भरण-पोषण करता हो अथवा सप्ताह में कम से कम एक अछूत विद्यार्थी के साथ घर में भोजन करता हो, उसे कांग्रेस का सदस्य बनने की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर ऐसी शर्त होती तो आप उस बेतुके दृश्य से बच सकते थे, जहां जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष को मंदिर में अछूतों की प्रवेश करने का विरोध करते देखा गया था।
आप कह सकते हैं कि कांग्रेस मजबूती चाहती थी और इसीलिए वह ऐसी शर्त निर्धारित करना अनुचित समझती थी। तब मेरा यह कहना है कि कांग्रेस सिद्धांतों की अपेक्षा अपनी मजबूती का अधिक ध्यान रखती है। यह आपके और कांग्रेस के विरुद्ध मेरा आरोप है। आप कहते हैं, ब्रिटिश सरकार हृदय परिवर्तन नहीं दर्शाती। मैं भी कहता हूँ कि हिन्दुओं ने भी हमारी समस्याओं के संबंध में हृदय परिवर्तन नहीं दर्शाया है, और जब तक वे अटल रहेंगे तब तक हम न तो कांग्रेस और न ही हिंदुओं पर विश्वास करेंगे। हम स्वाबलम्बन और आत्म-सम्मान में विश्वास करते हैं। हम महान नेताओं और महात्माओं पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं। मैं इस बारे में निर्दयतापूर्वक स्पष्टवादी हूं। इतिहास कहता है कि क्षणभुंगर मृग मरीचिका के समान महात्मा का सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता। कांग्रेसियों को हमारे आंदोलन का विरोध क्यों करना चाहिए और मुझे देशद्रोही क्यों कहना चाहिए?
डॉ. अम्बेडकर अब जोश में आ गए। उनका चेहरा तमतमा गया और आंखे चमकने लगीं। वे कुछ क्षण के लिए रुके और तब कड़वाहट और क्रोधित लहजे में बोलते रहे।
अम्बेडकर : गांधी जी मेरा कोई स्वदेश नहीं है!
गांधी : (अवाक रह गए और उन्हें बीच में टोका) : आपका स्वदेश है और गोल मेज सम्मेलन में आपके कार्य की जो रिपोर्ट मुझे मिली है उससे मैं जानता हूं आप पक्के देशभक्त हैं।
अम्बेडकर : आप कहते हैं, मेरा स्वदेश है, परंतु मैं अभी भी दोहराता हूं कि मैं इससे वंचित हूं। मैं इस भूमि को अपना स्वदेश और इस धर्म को अपना कैसे कह सकता हूं जिसमें हमसे कुत्तों-बिल्लियों से भी खराब व्यवहार किया जाता है, जहां हमें पीने को पानी नहीं मिल सकता। कोई भी आत्मसम्मानी अछूत इस देश पर गौरव नहीं करेगा। इस देश द्वारा हम पर किया गया अन्याय और दी गई पीड़ा इतनी अधिक है कि अगर जानबूझकर अथवा अज्ञानतावश हम इस देश के