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की प्रातःकाल मणि भवन में महात्मा गांधी से लंबी बातचीत हुई।
यह प्रतीत होता है कि गांधी जी ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि 200 से अधिक गांवों में वह इस बात से प्रभावित हुए कि छूआछूत के विरुद्ध आंदोलन तीव्र प्रगति कर रहा है और यह बुराई धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।
डॉ. अम्बेडकर का विचार इस विचार से भिन्न बताया गया है और उन्होंने कहा कि किसी गांव अथवा स्थान में गांधी जी की उपस्थिति ने वैसा ही असामान्य वातावरण सृजित किया जैसा किसी साधु की उपस्थिति करेगी और लोग अस्थायी रूप से इस अंतर को भूल जाते हैं। इसलिए गांधी सही स्थिति का निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं।
उन्होंने गांधी जी को यह सुझाव भी दिया कि हरिजन बोर्ड को उच्च जाति के हिन्दुओं के विरुद्ध कानूनी कदम उठाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
गांधी जी ने उत्तर दिया कि बुराई को हटाने की सर्वोत्तम पद्धति अनुनय है और कानूनी सहायता देने के प्रश्न पर बोर्ड द्वारा विचार किया जाना होगा।
प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने गांधी जी से पूछा कि क्या 7 अगस्त के बाद हरिजन बोर्ड अस्तित्व में रहेगा या नहीं? कब तक गांधी जी केवल गैर-राजनीतिक कार्यों (गतिविधियों) में भाग लेने की प्रतिज्ञा के अधीन रहेंगे। उसी सदस्य ने गांधी जी से पूछा कि क्या उन्होंने अपनी भावी कार्रवाई के लिए कोई ईश्वरीय प्रेरणा ली है। गांधी जी ने उत्तर दिया कि उन्होंने अभी तक ऐसा कुछ भी प्राप्त नहीं किया है और कहा कि ‘‘अगर आप चाहते हैं, तो आप भी ईश्वर से प्रेरणा ले सकते हैं।’’
अम्बेडकर का प्रतिनिधिमंडल
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डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में जिन्होंने शनिवार को महात्मा गांधी से मुलाकात की निम्नलिखित शामिल थे :-
श्री जी. वी. नायक
डॉ. पी. जी. सोलंकी
श्री अमृतराव खम्बे, और
श्री बाबूराव गायकवाड।’’ ख्1,
- द बंबई क्रॉनिकल, दिनांक 17 जून, 1934 ।