58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने भारत के आगामी संविधान के आलोक में पैनल तथा दलित वर्ग के उम्मीदवारों के प्रारंभिक चुनाव के प्रश्न पर गांधी से बात करने का निर्णय लिया। वे लंदन प्रस्थान करने की अपनी तैयारी करने की जल्दबाजी में थे। फिर भी उन्हें बैठकों में भाग लेना था, न्यायालय जाना था अथवा मुकदमों को निपटाना था। घरेलू कार्यों के लिए व्यवस्थाएं करनी थीं और पुस्तकों का चयन करना था। श्री मोरे, शिंदे, गायकवाड और चव्हाण के साथ उन्होंने 23 अप्रैल, 1933 को यरवदा जेल में गांधी से मुलाकात की। गांधी और अम्बेडकर आम के पेड़ के नीचे कुर्सियों पर बैठे और महादेव देसाई नोटबुक और पेंसिल लेकर समीप ही बैठ गए।
सर्वप्रथम, डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि पैनल की विधि महंगी होगी और गाँधी से कहा कि दलित वर्गों के उम्मीदवारों को जो आम चुनाव लड़ेंगे, प्रारंभिक चुनाव में दलित वर्गों के कम से कम 25 प्रतिशत वोट प्राप्त करने चाहिएँ। गाँधी ने उत्तर दिया कि वे इस मामले पर विचार करेंगे और लंदन के अपने संबोधन में अपनी प्रतिक्रिया के बारे में उन्हें सूचित करेंगे। गाँधी ने तब डॉ. अम्बेडकर को पुष्पगुच्छ दिया और बातचीत को अस्पृश्यता निवारण के प्रश्न की ओर मोड़ दिया और कहा कि सनातनी उनकी (गाँधी) दैत्य के रूप में निंदा कर रहे हैं। डॉ. अम्बेडकर ने गाँधी से पूछा कि वे सनातनियों से इससे और अधिक क्या आशा करते हैं। गाँधी ने बात पकड़ी और कहा कि दलित वर्गों के नेता भी उनके कार्यों से प्रसन्न नहीं हैं। अंत में गाँधी ने अम्बेडकर से लंदन से उनकी वापसी की तारीख पूछी। डॉ. अम्बेडकर ने उत्तर दिया कि यह लगभग अगस्त, 1933 होगी। गाँधी ने अम्बेडकर को शुभ यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी और साक्षात्कार समाप्त हुआ।’’ ख्1,
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ऊंची जाति के हिन्दुओं के विरुद्ध जिन्होंने अछूतों को परेशान किया,
कानूनी कदम उठाना
डॉ. अम्बेडकर के साथ वार्तालाप
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और उनके दल के सदस्यों की छूआछूत के विरुद्ध प्रारंभ किए गए हरिजन आंदोलन की प्रगति के प्रश्न पर शनिवार, 16 जून, 1934
- कीर, पृष्ठ 238 ।