31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 109

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. अगला प्रश्न इसके कार्यान्वयन का है। इसे कार्यान्वित करने के दो तरीके हैं। एक तरीका है संधि द्वारा। दूसरा तरीका है संविधान में एक अनुच्छेद जोड़कर। मुझे दूसरा तरीका सही लगता है।

  2. यह बात संविधान की उद्देशिका में संशोधन के सुझाव के विरुद्ध प्रतीत हो सकती है। मैं स्वीकार करता हूँ कि मेरे दृष्टिकोण में बदलाव आया है। यह बदलाव औपनिवेशिक दर्जे हेतु दिए गए राष्ट्रमंडल नागरिकता के नए सुझाव के कारण आया है। मैं स्वतंत्र उपनिवेश के दर्जे के पक्ष में था, क्योंकि यह प्रत्येक उपनिवेश को अपने नागरिकों की परिभाषा निर्धारित करने का अधिकार प्रदान करता है। साझा नागरिकता मुझे भारत की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए खतरा महसूस होती है। क्योंकि इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल नागरिकों के विरुद्ध अपने राष्ट्रिकों के संरक्षण की भारत की स्वतंत्रता छिन जाएगी। स्वतंत्र उपनिवेश के दर्जे का मूल आधार अर्थात् सम्राट के प्रति सत्यनिष्ठा मुझे राष्ट्रमंडल नागरिकता के नये आधार की तुलना में कम खतरनाक प्रतीत होता है।

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