हैं जबकि मध्य प्रदेश के ब्राह्मण, नागपुर चाहते हैं। और लोग भी हैं जो तीसरा विकल्प पेश कर रहे हैं कि विधानसभा का सत्र इन दानों शहरों में बारी-बारी से आहूत किया जाए। मुझे विश्वास है कि कहीं संयुक्त महाराष्ट्र के नाम पर हम पेशवा राज्य की वापसी तो नहीं कर रहे। मेरा सुझाव है कि संयुक्त महाराष्ट्र की राजधानी औरंगाबाद को बनाया जाए। इसी के नजदीक दौलताबाद भी है जो मुस्लिमों द्वारा इसे नष्ट किए जाने तक यह महाराष्ट्र की राजधानी थी। यहाँ का मौसम बहुत सुहावना होता है।
इस प्रश्न का निपटारा तुरंत किया जाना चाहिए। कांग्रेस आला कमान चाहे जो कुछ कहे, इस बात की जरा भी संभावना नहीं है कि कोई गुजराती महाराष्ट्रीय उम्मीदवार को वोट देगा और कोई महाराष्ट्री किसी गुजराती उम्मीदवार को।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (नई दिल्ली)” ख्1,
1 दि फ्री प्रेस जर्नल, दिनांक 31 मई, 1956