41. महाराष्ट्र के लिए अम्बेडकर का फार्मूला जनता की आवाज - Page 128

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मुझे प्राप्त पत्रों को देखकर महसूस होता है कि महाराष्ट्रवादी महाराष्ट्र - बम्बई मुद्दे पर हाल ही में राज्य सभा में पेश किए गए मेरे प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें डर है कि बम्बई शहर में उनका बहुमत नहीं रहेगा।

दूसरी ओर, गुजराती भाई महसूस करते हैं कि 15 प्रतिशत गुजराती आबादी के चलते 100 सदस्यों के सदन में उन्हें ज्यादा से ज्यादा दो से चार सीटें हासिल हो पाएंगी। दोनों समुदाय असहाय रहते हुए एक-दूसरे पर झुंझलाएंगे। अतः मैं एक और प्रस्ताव पेश करता हूँ।

मेरा सुझाव है कि महाराष्ट्र राज्य को दो राज्यों में बांट दिया जाए, जिसमें से एक राज्य में (1) वृहत्तर बम्बई; (2) ठाणा जिला; (3) कोलाबा; (4) रत्नागिरि; (5) कोल्हापुर; और (6) सूरत जिले के मराठी भाषी इलाके, बेलगांव और कारवार जिले शामिल हों। विभाजन रेखा सह्याद्रि पर्वत होगा।

इस बंटवारे के फायदे इस प्रकार हैं : (1) इससे उत्तर बम्बई के जरिए बम्बई पर महाराष्ट्रीय लोगों का बहुमत होगा; (2) यह एक अलग सांस्कृतिक इकाई है; (3) यह एक अलग भाषाई इकाई है; (4) इस इकाई का कुल क्षेत्रफल 19,800 वर्ग मील और कुल आबादी 9,067,413 है जिसे देखते हुए यह पर्याप्ततः बड़ा राज्य है। यहाँ के लोग समुद्र और सैन्य परम्परा दोनों से जुड़े हैं।

मैं समझ नहीं पाता कि क्यों ब्राह्मण लोग संयुक्त महाराष्ट्र पर जोर दे रहे हैं। इसके बावजूद सत्ता पर दावा करने वाले दो प्रतिद्वंद्वी होंगे : श्री बी. एस. हीरे और श्री रामराव एम. देशमुख। संभव है कि डॉ. पंजाबराव देशमुख का अपना अलग दृष्टिकोण हो।

कठिनाई पैदा करने वाली एक और बात है और वह महाराष्ट्र के दूसरे हिस्से की राजधानी से संबंधित है। दक्षिणी ब्राह्मण पूना को राजधानी के रूप में चाहते